रेलवे के नए नॉर्दर्न जीएम आरके कुलश्रेष्ठ शुक्रवार शाम से स्टेशन के गेस्ट हाउस में ठहरे हैं। शनिवार को एक फिर एग्जीक्यूटिव लांज में बैठकर उन्होंने चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन को वर्ल्ड क्लास का बनाने की मीठी गोली दी। इतना ही नहीं उन्होंने स्टेशन का जायजा लेकर यहां के हालात तक नहीं जांचे।
हालांकि वह चंडीगढ़ स्थित सुखना लेक, एलांते मॉल, माता मनसा देवी मंदिर में घूमने गए। काफी देर तक इन स्थानों पर उन्होंने समय बिताया। लेकिन 24 घंटे में उन्हें ये नहीं लगा कि चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर पंचकूला और चंडीगढ़ साइड यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं जायजा ले लिया जाए। इस बात की चर्चा शनिवार को पूरा दिन स्टेशन पर लोग करते नजर आए।
बता दें कि एक दशक से चंडीगढ़ को वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन बनाने की बात कही जा रही है। लेकिन बात सिर्फ प्लानिंग तक पहुंची है। इधर वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन बनाने के चक्कर में चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर पंचकूला की तरफ विकास कार्य ठप हैं। आलम ये है कि पंचकूला साइड से चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर आने वाले यात्री बुनियादी सुविधाओं के लिए भी तरस गए हैं। हर बार रेलवे के अधिकारी आते हैं और वर्ल्ड क्लास रेलवे स्टेशन बनाने की मीठी गोली पब्लिक को दे जाते हैं।
निशक्तों के लिए रैंप और व्हील चेयर तक नहीं
चंडीगढ़ स्टेशन को भूले नॉर्दर्न जीएम
- फोटो : अमर उजाला
दिसंबर तक था दावा, फिर जुलाई तक टाला
दिसंबर 2016 में ही चंडीगढ़ रेलवे स्टेशन पर आने वाले यात्रियों को पंचकूला की तरफ बने प्लेटफार्म नंबर छह पर सुविधाएं मुहैया कराने का दावा किया गया था। लेकिन अब तक प्लेटफार्म का काम भी पूरा नहीं हो पाया है। जबकि इस प्लेटफार्म को पूरा करने का समय अक्तूबर 2016 में ही बीत गया। इस बार नॉर्दर्न जीएम ने जुलाई तक प्लेटफार्म नंबर छह शुरू करने का दावा किया है। फिर कहीं डेट आगे न टल जाए। क्योंकि यह प्रोजेक्ट शुरू से ही कभी बजट तो कभी नक्शे के चक्कर में उलझा हुआ है। इस प्लेटफार्म पर शेड भी नहीं डाला गया है।
निशक्तों के लिए रैंप और व्हील चेयर तक नहीं
ये कैसा रेलवे स्टेशन है जहां पर पंचकूला साइड निशक्तों के आने जाने के लिए न तो रैंप की व्यवस्था है और न ही व्हील चेयर की। ऐसी स्थिति में निशक्तों और सीनियर सिटीजन को गोद में उठाकर उनके परिवार के सदस्य उन्हें प्लेटफार्म तक ले जाते हैं। कई बार तो निशक्तों के साथ उनके परिवार के सदस्य नहीं होते। ऐसे में उन्हें पंचकूला साइड जब सुविधाएं नहीं मिलती तो निराश होकर काफी दूर से घूमकर चंडीगढ़ स्टेशन की तरफ जाना पड़ता है। ऐसे में उनका पैसा और समय दोनों बर्बाद होता है।
पिक एंड ड्राप लाइन राम भरोस
पिक एंड ड्रॉप लाइन के नाम पर पत्थर के कुछ टुकड़े रेलवे स्टेशन पर पंचकूला साइड में रख दिए गए हैं। शताब्दी के समय रोजाना यहां पर जाम लग जाता है। क्योंकि ट्रैफिक पुलिस का एक भी मुलाजिम यहां पर तैनात नहीं होता।
शाम चार बजे के बाद नहीं होता रिजर्वेशन
चंडीगढ़ स्टेशन को भूले नॉर्दर्न जीएम
- फोटो : अमर उजाला
प्लेटफार्म और स्लीपर भी जगह जगह टूटे
हैरत की बात है कि जिस प्लेटफार्म पर शताब्दी जैसी ट्रेन का रोजाना आना जाना है, उस प्लेटफार्म के करीब 179 स्लीपर टूटे हैं। प्लेटफार्म नंबर तीन और चार के फर्श भी कई जगह टूटे हैं। यहां तक सीढ़ियों के पास गड्ढे हैं। यहां पर यात्री गिरकर घायल भी हो जाते।
स्टेशन पर यात्री सुरक्षित नहीं हैं।
रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था जीरो है। क्योंकि जीआरपी के मुुलाजिम शाम ढलने के बाद रेलवे स्टेशन पर नजर नहीं आते। इस मसले को अमर उजाला पहले भी कई बार उठा चुका है। लेकिन विभाग के आला अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर आंखें मूंदे हैं।
शाम चार बजे के बाद नहीं होता रिजर्वेशन
पंचकूला साइड रेलवे स्टेशन पर शाम चार बजे के बाद रिजर्वेेशन काउंटर बंद हो जाता है। इस संबंध में अंबाला डिवीजन के आला अधिकारियों को लोगों ने कई बार सूचित कराया। हर बार उनका जवाब होता है कि शाम को रिजर्वेशन के लिए पंचकूला साइड यात्री आते ही नहीं हैं। इसलिए काउंटर बंद करा दिया गया है। जबकि पंचकूला के स्थानीय लोग टिकट बुकिंग काउंटर बंद होने से परेशान हैं। उन्हें टिकट बुकिंग के लिए चंडीगढ़ स्टेशन की तरफ जाना पड़ता है।