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कोरोना से संकट: नॉन कोविड मरीजों के लिए भी आफत बना कोरोना, बिना इलाज के बढ़ने लगा मर्ज

Thu, 22 Apr 2021 01:27 PM IST
निवेदिता वर्मा वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ 

सार

अस्पतालों द्वारा टेलीकंसल्टेशन के लिए जारी किए गए नंबर लगाते-लगाते मरीज परेशान हैं।अचानक मरीजों का दबाव बढ़ने के कारण ज्यादातर नंबर व्यस्त बताए जाते हैं।
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चंडीगढ़ में अस्पतालों की तरफ से जारी टेलीकंसल्टेशन नंबर रहते हैं व्यस्त। - फोटो : iStock
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विस्तार
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चंडीगढ़ में कोरोना के मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या के कारण अस्पतालों की ओपीडी पूरी तरह बंद कर दी गई है। ऐसे में नॉन कोविड मरीजों के इलाज पर एक बार फिर खतरा मंडराने लगा है। अस्पतालों द्वारा टेलीकंसल्टेशन के लिए जारी किए गए नंबर लगाते-लगाते मरीज परेशान हैं। 

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अचानक मरीजों का दबाव बढ़ने के कारण ज्यादातर नंबर व्यस्त बताए जाते हैं। ऐसी स्थिति में नॉन कोविड मरीजों का मर्ज गंभीर होता जा रहा है। मरीजों का कहना है कि कोरोना के कारण उनका इलाज बंद कर गलत किया जा रहा है। उनके मर्ज के इलाज के लिए भी अस्पताल में अलग से व्यवस्था की जानी चाहिए।

कई मामले आ रहे सामने

बलटाना निवासी जीबी यादव को पथरी की परेशानी है। कुछ दिन पहले ही उन्हें भयंकर दर्द हुआ तो जीएमसीएच- 32 में इलाज कराने पहुंचे। जांच रिपोर्ट से पता चला कि उनकी किडनी में पथरी है। जब तक इलाज शुरू होता, तब तक अस्पताल की ओपीडी बंद हो चुकी थी। अब वह दर्द से परेशान हैं, लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा, क्योंकि जीएमसीएच 32 में टेलीकंसल्टेशन के माध्यम से परामर्श दिया जा रहा है। जीबी यादव का फोन उस नंबर पर कभी लगता ही नहीं।

केस- 2
हल्लोमाजरा निवासी तजिंदर सिंह के साथ भी इसी तरह की परेशानी है। तजिंदर को मधुमेह है। इन दिनों उनकी परेशानी काफी बढ़ गई है। वह जीएमसीएच- 32 में डॉ. मनदीप सिंगला की स्पेशल क्लिनिक में इलाज करवाते हैं, लेकिन ओपीडी सेवा पूरी तरह बंद हो जाने से उनका इलाज भी बाधित हो गया है। उनकी स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। तजिंदर सिंह का कहना है कि कोविड के कारण अन्य मरीजों को नजरअंदाज किया जाना गलत है। 
 
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जीएमएसएच- 16 की ओपीडी भी बंद 

कोरोना संक्रमण के कारण जीएमसीएच-32 व पीजीआई की व्यक्तिगत ओपीडी पहले ही बंद कर दी गई है। मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए जीएमएसएच- 16 की ओपीडी भी गुरुवार से पूरी तरह बंद कर दी गई ताकि अस्पताल में ज्यादा संख्या में लोगों के एकत्र होने की नौबत न आए। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल में संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है। इसलिए पीजीआई समेत अन्य अस्पतालों में भी टेलीकंसल्टेशन के माध्यम से ही मरीजों को परामर्श देने का निर्णय लिया गया है।

कोरोना संक्रमण की रफ्तार से स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। अगर मौजूदा समय में उसकी चेन को तोड़ने के लिए समुचित उपाय नहीं किए गए तो फिर नियंत्रण पाना असंभव होगा। इसे ध्यान में रखते हुए ही ओपीडी बंद करने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान भी इमरजेंसी व ट्रॉमा के मरीजों को पूर्व की ही तरह इलाज उपलब्ध होता रहेगा। -डॉ अमनदीप कंग, निदेशक स्वास्थ्य

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