बलटाना निवासी जीबी यादव को पथरी की परेशानी है। कुछ दिन पहले ही उन्हें भयंकर दर्द हुआ तो जीएमसीएच- 32 में इलाज कराने पहुंचे। जांच रिपोर्ट से पता चला कि उनकी किडनी में पथरी है। जब तक इलाज शुरू होता, तब तक अस्पताल की ओपीडी बंद हो चुकी थी। अब वह दर्द से परेशान हैं, लेकिन उन्हें इलाज नहीं मिल पा रहा, क्योंकि जीएमसीएच 32 में टेलीकंसल्टेशन के माध्यम से परामर्श दिया जा रहा है। जीबी यादव का फोन उस नंबर पर कभी लगता ही नहीं।
केस- 2
हल्लोमाजरा निवासी तजिंदर सिंह के साथ भी इसी तरह की परेशानी है। तजिंदर को मधुमेह है। इन दिनों उनकी परेशानी काफी बढ़ गई है। वह जीएमसीएच- 32 में डॉ. मनदीप सिंगला की स्पेशल क्लिनिक में इलाज करवाते हैं, लेकिन ओपीडी सेवा पूरी तरह बंद हो जाने से उनका इलाज भी बाधित हो गया है। उनकी स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। तजिंदर सिंह का कहना है कि कोविड के कारण अन्य मरीजों को नजरअंदाज किया जाना गलत है।
कोरोना संक्रमण के कारण जीएमसीएच-32 व पीजीआई की व्यक्तिगत ओपीडी पहले ही बंद कर दी गई है। मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए जीएमएसएच- 16 की ओपीडी भी गुरुवार से पूरी तरह बंद कर दी गई ताकि अस्पताल में ज्यादा संख्या में लोगों के एकत्र होने की नौबत न आए। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्पताल में संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा है। इसलिए पीजीआई समेत अन्य अस्पतालों में भी टेलीकंसल्टेशन के माध्यम से ही मरीजों को परामर्श देने का निर्णय लिया गया है।
कोरोना संक्रमण की रफ्तार से स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। अगर मौजूदा समय में उसकी चेन को तोड़ने के लिए समुचित उपाय नहीं किए गए तो फिर नियंत्रण पाना असंभव होगा। इसे ध्यान में रखते हुए ही ओपीडी बंद करने का निर्णय लिया गया है। इस दौरान भी इमरजेंसी व ट्रॉमा के मरीजों को पूर्व की ही तरह इलाज उपलब्ध होता रहेगा। -डॉ अमनदीप कंग, निदेशक स्वास्थ्य