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Chandigarh News: हरिके वैट लैंड सेंक्चुअरी में अवैध निर्माण पर जवाब नहीं, सरकार पर 10 हजार रुपये जुर्माना

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-फिरोजपुर के डीसी को हलफनामा से स्पष्टीकरण का गत वर्ष नवंबर में दिया था आदेश
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-सेंक्चुअरी के निकट मौजूद दो गुरुद्वारों को लेकर भी सरकार से मांगा था जवाब
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब के फिरोजपुर स्थित हरिके वेटलैंड सेंक्चुअरी में अवैध निर्माण को लेकर जवाब दाखिल न करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए पंजाब सरकार पर 10 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। गत वर्ष नवंबर के आदेश का 9 माह बीत जाने पर भी पालन न होने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए आदेश जारी किया है।

इस मामले में फिरोजपुर निवासी जसकिरण जीत सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि फिरोजपुर तरनतारन और कपूरथला जिले में फैले सैंकड़ों एकड़ वेटलैंड पर बड़े स्तर पर अवैध तरीके से कब्जे हो रहे हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार फिरोजपुर जिले में पड़ी हरिके वेट लैंड सेंक्चुअरी की नियमों के अनुसार सेल डीड जारी नहीं की जा सकती। पंजाब सरकार ने इस बारे में अधिसूचना भी जारी की थी, लेकिन साल 2007 व 2008 के बीच इस जमीन के कुछ हिस्से की सेल डीड कर दी गई और अगस्त 2015 तक इस सेंक्चुअरी में लगभग बड़े स्तर पर निर्माण कार्य शुरू हो गए है, जिसमें दो गुरुद्वारा भी शामिल है।
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याची ने हाईकोर्ट में कुछ फोटो सौंपते हुए बताया कि फोटो साफ दर्शाती है कि वैट लैंड फेंसिंग के भीतर निर्माण कार्य जाेरों पर किया जा रहा है। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से अपील की है कि इस मामले में राज्य सरकार और पर्यावरण मंत्रालय को उचित निर्देश दिए जाएं, ताकि यह अवैध कब्जा रोका जा सके। हाईकोर्ट ने 2016 में निर्माण पर यथा स्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि डीसी व एसएसपी सुनिश्चित करें कि कोर्ट के आदेश का पालन हो। याची ने कहा कि इस सेंचुरी में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी आते हैं और यहां किसी भी प्रकार के ट्रांसफाॅर्मर नहीं लगाए जाने चाहिए बावजूद इसके बिजली विभाग ने एक ट्रांसफार्मर भी लगा दिया है, जिस कारण प्रवासी पक्षी जो यहां आकर बैठते है उनकी जान को खतरा बन गया है।
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सुनवाई के दौरान याची पक्ष ने कहा कि अभी भी वाइल्ड लाइफ सेंक्चुअरी में निर्माण कार्य जारी है जबकि हाईकोर्ट 2016 में यथा स्थिति के आदेश जारी कर चुका है। फिरोजपुर के डीसी ने कहा कि किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण हाईकोर्ट के आदेश के बाद नहींं हुआ है। हाईकोर्ट ने डीसी के रवैए पर सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ समय पहले तक वह अवैध निर्माण की बात मान रहे थे और अब अचानक उनका रुख बदल गया है। ऐसे में हाईकोर्ट ने डीसी को हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया था। साथ ही दो गुरुद्वारों को लेकर जवाब मांगा था कि वे वनक्षेत्र के बाहर हैं या सेंक्चुरी के भीतर।
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