चुनाव आयोग ने चुनाव प्रचार के लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया का प्रयोग करने बारे में निर्देश जारी किए हैं।
हरियाणा के मुख्य चुनाव अधिकारी श्रीकांत वाल्गद ने बताया कि बिना प्रमाणीकरण के कोई भी राजनीतिक विज्ञापन इंटरनेट या इंटरनेट आधारित मीडिया पर नहीं दिखाया जा सकेगा।
इंटरनेट साइट्स को राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को आयोग के मांगने पर राजनीतिक विज्ञापन के खर्च की जानकारी देनी होगी।
इंटरनेट मीडिया जांच कर यह सुनिश्चित करेगा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन या दुर्भावनापूर्ण या गैर-कानूनी सामग्री प्रदर्शित तो नहीं की गई हो। यदि गैर कानूनी सामग्री नोटिस में आई तो संबंधित इंटरनेट आधारित मीडिया के ध्यान में लाया जाएगा और हटाया जाएगा।
वाल्गद ने बताया कि मुख्य तौर पर पांच प्रकार के सोशल मीडिया हैं जिनमें विकीपीडिया, ब्लॉग और माइक्रो ब्लॉग मसलन ट्वीटर, सामुदायिक सामग्री जैसे कि यू-ट्यूब, सोशल नेटवर्किंग साइट्स, वर्चुअल गेम जैसी एप्लीकेशन शामिल हैं।
आदर्श आचार संहिता के लागू होने के बाद उम्मीदवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी देनी होगी। चुनाव प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक विज्ञापन का प्री-सर्टिफीकेशन कराना अनिवार्य होगा।
हर उम्मीदवार या उसके चुनावी एजेंट को नामांकन वाले दिन से लेकर परिणाम घोषित होने वाले दिन तक चुनाव से संबंधित सारे खर्चों की सही जानकारी एक अलग खाते में रखनी जरूरी है।