पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारा करतारपुर साहिब की पहली मंजिल, जहां श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सुशोभित हैं, उस पवित्र स्थान पर पाकिस्तानी मुस्लिमों को जाने की इजाजत नहीं है। पाकिस्तानी मुस्लिम गुरुद्वारा साहिब की पहली मंजिल पर जहां श्री गुरु नानक देव जी की समाधि (दरगाह) विराजमान है, वहीं सजदा कर सकते हैं।
पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (पीएसजीपीसी) के अध्यक्ष सतवंत सिंह ने एक संदेश में यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तानी मुस्लिम किसी सिख के साथ गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने के लिए आए तो उसे इसकी अनुमति दी जाती है। एक उत्तर में भाई सतवंत सिंह ने बताया कि पाकिस्तानी मुस्लिमों को गुरुद्वारा साहिब में जाने की इसलिए इजाजत नहीं है कि कहीं गलती से उनसे मर्यादा भंग न हो जाए।
पाकिस्तानी मुस्लिमों से वसूले जाते हैं 200 रुपये
पीएसजीपीसी के अध्यक्ष सतवंत सिंह ने बताया कि गुरुद्वारा साहिब की पहली मंजिल में विराजमान समाधि के दर्शन के लिए आने वाले मुस्लिमों के प्रवेश के लिए पाकिस्तान सरकार ने 200 रुपये की फीस तय की है। पाकिस्तानी सिखों को छोड़कर शेष सभी धर्म के लोगों से गुरुद्वारा साहिब में प्रवेश से पहले यह फीस वसूली जा रही है।
इस संदर्भ में भाई सतवंत सिंह ने कहा कि पीएसजीपीसी ने पाकिस्तान सरकार को एक पत्र लिख कर इस फीस को माफ करने का आग्रह किया है। बता दें कि पाकिस्तान ने भारतीय श्रद्धालुओं से भी 20 अमरीकी डॉलर यानि 1400 रुपये की फीस की शर्त थोप रखी है।