चंडीगढ़ में वी 6 रोड पर पेवर ब्लॉक लगाने पर रोक के बाद पार्षदों की आपत्ति पर बनाई गई टीम ने अपनी रिपोर्ट एडवाइजर को सौंप दी है। रिपोर्ट में कहा है कि पेवर ब्लॉक से पेड़ों को काफी नुकसान हो रहा है। पार्किंग के नाम पर लगाए जा रहे पेवर ब्लॉक पेड़ों को काफी नुकसान पहुंचा रहे हैं, इसलिए जो काम चल रहा है, उसे छोड़कर अन्य नए कामों का टेंडर न दिया जाए। स्पेशल कमिश्नर संजय कुमार झा के नेतृत्व में बनाई गई टीम में चीफ इंजीनियर मनोज बंसल, चीफ आर्किटेक्ट कपिल सेतिया व एसई संजय अरोड़ा थे।
टीम ने मई के अंत में रिपोर्ट एडवाइजर मनोज परिदा को सौंपी है। जिसमें कहा गया है कि पेवर ब्लॉक लगाने से पेड़ों को काफी नुकसान हो रहा है। वहीं, टीम के सदस्यों का कहना है कि पार्किंग के नाम पर पेवर ब्लॉक तो लगा दिए जाएंगे, लेकिन पहले से ही लोगों ने वहां अतिक्रमण कर रखा है। दूसरी ओर, बारिश का पानी निकलने में भी काफी समस्या होती है। ऐसे में इसे लगाने का कोई फायदा नहीं है। इंजीनियरिंग विभाग के अनुसार मास्टर प्लान 2031 में वी-6 रोड के किनारों पर पेवर ब्लॉक नहीं लग सकते हैं।
ज्ञात हो कि पिछले साल 30 अक्तूबर और इस साल 29 जनवरी को बनाई गई पेवर ब्लॉक की पॉलिसी पर कुछ सिफारिशें आई थीं, जिसके अनुसार वी-3 और 6 रोड पर पेवर ब्लॉक लगाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी गई थी, इसके बावजूद नगर निगम वी-6 रोड के किनारों पर पेवर ब्लॉक लगा रहा था। वहीं पार्षदों ने भी इस पॉलिसी का विरोध किया था। एडवाइजर के हस्तक्षेप के बाद एक कमेटी बनाकर मामले का रिव्यू करने को कहा गया था।
पॉलिसी पर प्रशासन ने भी जताई थी आपत्ति
नगर निगम ने पेवर ब्लॉक लगाने के लिए जो पॉलिसी बनाई थी, उस पर प्रशासन ने कई पहलुओं पर आपत्ति लगाई थी। वी-6 रोड के किनारे पर पेवर ब्लॉक लगाने से पार्षदों की परेशानी बढ़ गई है। हर पार्षद अपने वार्ड के रिहायशी इलाकों के वी-6 रोड के किनारों पर पेवर ब्लॉक लगाने के पक्ष में था क्योंकि यहां रात के समय वाहन पार्क हो सकते थे, लेकिन रोक लगने के बाद उनकी योजनाओं पर पानी फिर गया। वहीं, जिन पार्षदों के वार्डों में काम शुरू हुआ है, उनके लिए राहत की बात है क्योंकि इससे पूर्व सभी कार्यों पर रोक लगा दी गई थी।
नगर निगम ने वी-3 पर लगा रखी है पाबंदी
प्रशासन ने वी-4 और वी-5 रोड पर दीवार से छह फुट की जगह छोड़कर पेवर ब्लॉक लगाने की मंजूरी दी है, जबकि वी-3 रोड पर पेवर ब्लॉक लगाने पर पहले से नगर निगम ने पाबंदी लगा रखी है। मालूम हो कि इस समय भी शहर में सबसे ज्यादा पेवर ब्लॉक लगे हुए हैं, जिस कारण बारिश के पानी की निकासी भी नहीं हो पाती है। प्रशासन ने नगर निगम से कहा है कि शहर में लगे पेड़ों से कुछ दूरी छोड़कर पेवर ब्लॉक लगाए जाएं। बावजूद इसके पेड़ों की जड़ों तक पवर ब्लॉक लगा दिए गए हैं। इससे पेड़ सूख रहे हैं और आंधियों में गिर रहे हैं।
ग्रीन पेवर पर भी जताई है आपत्ति
प्रशासन ने पार्कों के बाहर लगने वाले ग्रीन पेवर पर भी आपत्ति जताई है। नगर निगम ने पार्कों के बाहर 12 फुट तक ग्रीन पेवर लगाने की पॉलिसी बनाई है, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह नीतिगत फैसला है और पूरी रोड बर्म को इस तरह से पेवर से नहीं भरा जा सकता। नगर निगम के अनुसार ग्रीन पेवर लगने से उन पर वाहन पार्क हो पाएंगे, जबकि प्रशासन के आर्किटेक्ट विभाग ने ब्यूटीफिकेश्न के लिए कंक्रीट और पेवर लगाने पर अपनी मंजूरी दे दी थी।
पेवर ब्लॉक से हर पल पेड़ों को मार रहे
पर्यावरण प्रेमी राहुल महाजन का कहना है कि शहर में करोड़ों रुपये के पेवर ब्लॉक लगने से काफी नुकसान हो रहा है। वाटर लेबल लगातार गिर रहा है। साथ ही पेड़ों की जड़ों तक सीमेंट लगा देने से उन्हें हर पल मार रहे हैं। पेड़ सूख रहे हैं और आंधियों में गिर रहे हैं। इंजीनियरिंग विंग पहले से ही पूरे शहर को कंक्रीट में बदल चुका है। अब यह निर्णय थोड़ा राहत देने वाला है, लेकिन सही से अमल लाया जाए तो।
सेक्टरों के अंदर की रोड होती हैं वी 6
सेक्टरों केअंदर बनीं लगभग 5 फुट की सड़कें वी 6 रोड कहलाती हैं। रेजिडेंशियल एरिया में ही वी 6 रोड हैं ताकि घरों केसामने लोग आसानी से गाड़ी खड़ी कर सकें, लेकिन कमेटी का कहना है कि ज्यादातर वी 6 सड़कों पर अतिक्रमण किया गया है। ऐसे में पेवर ब्लॉक लगाने का कोई मतलब नहीं।