पंजाब विधानसभा चुनाव को 27 दिन बचे हैं, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी तक घोषणा पत्र तैयार नहीं किए हैं और चुनाव प्रचार शुरू हो गया है। आमतौर पर सभी पार्टियां इस समय तक वोट के बदले जनता से किए जाने वाले वादों की फेहरिस्त यानी चुनाव मेनिफेस्टो जारी कर देती है, लेकिन पंजाब में इस बार ऐसा नहीं हुआ।
खास बात यह है कि राज्य में जिन दो दलों शिअद भाजपा गठबंधन और कांग्रेस के बीच हमेशा से मुकाबला होता रहा है, वे भी अभी तक मेनिफेस्टो जारी नहीं कर पाईं। जबकि पंजाब में पहली बार चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी अपना मेनिफेस्टो जनता के सामने रख चुकी है। आम आदमी पार्टी ने राज्य की 117 विधानसभा सीटों में से 110 सीटों पर अपने प्रत्याशी भी उतार दिए हैं।
दूसरी ओर, राज्य की सत्ता में सिलसिलेवार बने रहने वाले राजनीतिक दल इन दोनों मामलों में पिछड़ गए हैं। हालांकि, कांग्रेस का मेनिफेस्टो कल या परसों तक आने के संकेत पार्टी की प्रदेश इकाई से मिल गए हैं, लेकिन सत्तारूढ़ शिअद व भाजपा के मेनिफेस्टो अभी तैयार ही हो रहे हैं। इनके रिलीज में अभी एक हफ्ता लग सकता है।
यानी जब तक मेनिफेस्टो मतदाताओं के हाथ आएंगे, तब तक चुनाव प्रचार समाप्त होने में कुछ दिन ही शेष रह जाएंगे। संभव है, मेनिफेस्टो रिलीज में देरी शिअद, भाजपा व कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा भी हो।
शिअद गिनाएगा दस साल की उपलब्धियां
पंजाब विधानसभा चुनाव
सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच जहां शिरोमणि अकाली दल अपने मेनिफेस्टो में दस साल के शासन की उपलब्धियां गिनाते हुए भावी योजनाओं का जिक्र करेगा, वहीं भाजपा मोदी सरकार की ओर से पंजाब में शुरू की गई योजनाएं और उनके लिए दी जा रही वित्तीय मदद का उल्लेख करना नहीं भूल सकती।
वैसे भाजपा के प्रदेश नेता इस सवाल से बचते दिखाई दे रहे हैं कि मोदी सरकार की ओर से पंजाब को कोई विशेष पैकेज दिया जाएगा या नहीं? उधर, कांग्रेस ने इस बार अपने मेनिफेस्टो को आंकड़ों व तथ्यों पर आधारित दस्तावेज बनाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री व अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह की मदद ली है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कैप्टन अमरिंदर सिंह इस मुद्दे पर डॉ. मनमोहन सिंह से लगातार सलाह-मशविरा कर रहे हैं। पार्टी की ओर से यह भी एलान किया जा चुका है कि पार्टी का मेनिफेस्टो डॉ. मनमोहन सिंह ही जारी करेंगे। वैसे मेनिफेस्टो जारी होने तक कैप्टन पहले तो 9 सूत्रीय और अब 21 सूत्रीय एजेंडा जारी कर चुके हैं।
आप ने किसानों की सुसाइड और ड्रग्स को मुद्दा बनाया
केजरीवाल
आम आदमी पार्टी के किसानों-मजदूरों को लेकर तैयार मेनिफेस्टो में किसानों की आत्महत्याएं रोकने के लिए प्रदेश में सर छोटूराम एक्ट 1934 फिर से लागू करने, कर्जदार किसानों के घर व जमीन की कुर्की नहीं, किसान से कर्ज का ब्याज मूल से ज्यादा नहीं, कर्ज की ब्याज सीमा बैंकों के बेस रेट से अधिकतम एक फीसदी रहेगी, गरीब किसानों व किसान मजदूरों के बैंक कर्ज माफ किए जाएंगे, फसलों के कुदरती नुकसान पर किसान को 20 हजार रुपये एकड़ मुआवजा, फसलों की 24 घंटे में खरीद व 72 घंटे में भुगतान, किसानों को 12 घंटे मुफ्त बिजली, किसान की बेटी के विवाह को 51 हजार व बेटी के जन्म पर 21 हजार रुपये, सभी गांवों में आधुनिक सेहत क्लीनिक, किसान-मजदूरों के बच्चों को 10 लाख तक बिना शर्त शिक्षा लोन, एग्रोटेक्क यूनिटों को 10 साल तक टैक्स माफ, बीते 10 साल के दौरान आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवार को 5 लाख रुपये व एक सदस्य को नौकरी, भूमि रहित मजदूरों को बिना शर्त दो लाख के लोन के वादे किए गए हैं, जबकि उद्योगों के लिए टैक्स दरें कम करने और इंस्पेक्टर राज खत्म करने का वादे समेत कई वादे किए गए हैं।
युवाओं के लिए जारी 51 सूत्रीय यूथ मेनिफेस्टो में 25 लाख नौकरियां सृजित करने का वादा गया है। इसी तरह दलितों और ट्रेडर्स के लिए मेनिफेस्टो में भी कई वादे किए गए हैं। इन अलग-अलग मेनिफेस्टो में जो एक समान है, वह पार्टी द्वारा भ्रष्टाचार, नशा विरोधी और पारदर्शी सरकार देने का है।