पंजाब सरकार सूबे के सरकारी स्कूलों में 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को मुफ्त लैपटॉप देने के चुनावी वादे से पलटती दिखाई पड़ रही है।
सरकार ने विद्यार्थियों को लैपटॉप देने का वादा किया और फिर इसकी जगह टैबलेट देने की घोषणा कर दी। लेकिन अब ये टैबलेट भी गायब होते नजर आ रहे हैं क्योंकि सरकार ने इन पर खर्च होने वाली राशि से सरकारी स्कूलों की कंप्यूटर लैब्स की हालत सुधारने पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है।
दरअसल, शिअद ने 2012 के विधानसभा चुनाव के वक्त जारी घोषणा पत्र में 11वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को मुफ्त लैपटॉप देने का वादा किया था। लेकिन उस साल के बजट में यह वादा 12वीं के छात्रों तक सीमित हो गया और लैपटॉप के बजाय टैबलेट देने का फैसला ले लिया गया।
पिछले साल 16 जुलाई को वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींडसा की ओर से विधानसभा में पेश किए गए 2014-15 के बजट में ही सरकार के इस रवैये के संकेत मिल गए थे।
इस बजट में लैपटॉप या टैबलेट का कोई प्रावधान ही नहीं था। इस बारे में ढींडसा ने कहा था कि शिक्षा विभाग ने कोई भी संबंधित प्रस्ताव नहीं दिया, इसलिए प्रावधान नहीं किया गया है।
पंजाब सरकार का तर्क
शिक्षा मंत्री डॉ. दलजीत सिंह चीमा का कहना है कि 11वीं और 12वीं के छात्रों को टैबलेट देने की सुविधा कुछेक छात्रों तक ही सीमित हो जाएगी जबकि स्कूलों की कंप्यूटर लैब में सुधार का व्यापक लाभ होगा। इसलिए 2015-16 के बजट प्रस्तावों के लिए हम यही सुझाव देने जा रहे हैं।