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सुविधाओं की नहीं, नौजवानों को संयम की है कमी

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सुविधाओं की नहीं.. आजकल युवाओं में संयम की कमी : रीटा कोहली
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टीएफटी विंटर नेशनल थियेटर फेस्टिवल के रूबरू कार्यक्रम में साझा की कई बातें
बोलीं- रंगमंच के माध्यम से सींचने का काम भी कर रहे हैं युवा कलाकार
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। मौजूदा दौर में बच्चे और युवाओं को सुविधाओं की कमी नहीं, केवल संयम की कमी है। पुराने दौर में युवाओं से लेकर हर वर्ग को संयम था। इंटरनेट और सोशल मीडिया जैसी सुविधा नहीं थीं। लेकिन संयम भी अपार था। सोशल मीडिया सिर्फ का टाइम पास हो सकता है, लेकिन यहां भी आप अकेले ही हैं। इसलिए ऐसा कुछ कीजिए जिससे आप कुछ नया सीखे। वहीं युवा कलाकारों की ओर से रंगमंच में बेहतरीन कार्य किया जा रहा है। वे समाज को रंगमंच के माध्यम से सींचने का काम भी कर रहे हैं। यह सराहनीय है। कुछ इन बातों के साथ वीरवार को शहर की वकील रीटा कोहली ने अपने विचार रखे। बाल भवन में आयोजित 15वें टीएफटी विंटर नेशनल थियेटर फेस्टिवल के रूबरू कार्यक्रम में वे मुख्य वक्ता थीं। मंच पर उनके साथ यह कार्यक्रम पेशे से अध्यापक एवं रंगकर्मी अरुणिमा शर्मा ने उनसे सवालातों के सिलसिले को आगे बढाया।
हमेशा लोगों की सेवा के लिए तत्पर रहने वाली रीटा कोहली ने अपने जीवन के कुछ मजेदार किस्से साझा किया। उन्होंने बताया कि जब भी उनके साथियों को भाषण लिखवाना होता है तो वे उनके पास आते हैं और उन्हें भाषण लिखने को कहते हैं, क्योंकि उनके साथियों का मानना है कि रीटा की अंग्रेजी बहुत अच्छी है और उन्हें लगता है कि इन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कांवेंट स्कूल से ग्रहण की है। मगर आज रीटा ने पहली बार सबके साथ सांझा किया है कि उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा हिंदी मीडियम से ग्रहन करने के
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बाद एमसीएम कॉलेज से ग्रेजुएशन की है। उन्होंने यह भी बताया कि वह अंग्रेजी अखबार के पहले पेज के पहले अक्षर से लेकर अंतिम पेज के आखिरी अक्षर तक रोज पढ़ती थी, इसीलिए शायद उनकी अंग्रेजी अच्छी है।
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उनके मुताबिक उन्होंने थिएटर में प्रवेश पाने के लिए बहुत कोशिशें की, परंतु शायद ऊपर वाले को उनका दर्शक ही रहना मंजूर था। परंतु उनकी नियमित कोशिश रहती है कि वे ज्यादा से ज्यादा रंगमंच से जुड़ सकें। उन्होंने निर्देशक सुदेश शर्मा के 30 दिवसीय महाकुंभ को उन्होंने एक सशक्त कदम बताया। उन्होंने युवा कलाकारों को यह भी सलाह मशवरा दिया कि चाहे थिएटर हो या शिक्षा का क्षेत्र, जिसमें भी आप करिअर चुनें धैर्य और संयम के साथ फूंक फूंक कर कदम रखें। थोड़ा समय जरूर लगेगा, किंतु वह एक दिन जरूर मिलेगी।
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