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सभ्य समाज का कोर्ट मार्शल रोंगटे खड़े कर देगा

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चंडीगढ़। मेरा सामना कई बार मौत से हुआ है, मैंने बहुत से लोगों की जान ली है युद्ध के मैदान में और कोर्ट मार्शल में...। कर्नल सूरत सिंह के इस संवाद से जब सेक्टर- 23 बाल भवन में ‘कोर्ट मार्शल’ नाटक की शुरुआत हुई तो दर्शकों के रोंगटे खड़े हो गए। ऐसे बहुत से कम नाटक होते हैं, जिनका मंचन जितनी बार हो, हर बार ताजगी का अहसास कराते हैं। स्वदेश दीपक का लिखा कोर्ट मार्शल एक ऐसा ही नाटक है जो हर बार अपनी दमदार प्रस्तुति दर्ज कराता है। 15वें टीएफटी विंटर नेशनल थियेटर फेस्टिवल के अंतिम दिन कोर्ट मार्शल के मंचन के माध्यम से दर्शकों ने एक ऐसी सैनिक की कहानी देखी, जो अपने ही अधिकारी की हत्या व जानलेवा हमले का आरोप झेल रहा होता है।
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नाटक में दिखाया गया है कि किस प्रकार जातिवादी व सामंतवादी सोच निम्न वर्ग के प्रताड़ित लोगों का जीना मुहाल कर देती है। उनका इस हद तक शोषण किया जाता है कि सेना का सिपाही रामचंदर अपने ही अधिकारी की हत्या करने पर विवश हो जाता है। एक अधिकारी की हत्या और एक पर जानलेवा हमले के आरोप पर सेना कोर्ट मार्शल की कार्रवाई करती है। बचाव और शिकायतकर्ता के वकील अपनी दलीलें रखते हैं। आखिरी में हत्या का आरोपी रामचंदर जब बोलता है तो पता चलता है कि उसे अधिकारी लंबे समय से प्रताड़ित कर रहे थे। रामचंदर को बार-बार जाति सूचक शब्दों और गाली देकर अहसास कराया जाता था कि वह छोटी जाति का है। अधिकारी के घर आए मेहमानों के बच्चों की गंदगी साफ करवाने के लिए मजबूर किया जाता था।
अपने अधिकारियों के रवैये से क्षुब्ध प्रोसीडिंग ऑफिसर एवं अन्य सलाहकार पूरा मामला सुनने के बाद रामचंदर की प्रति सहानुभूति रखते हैं। फैसले से पहले प्रोसीडिंग आफिसर के प्रमोशन की एक पार्टी रखी जाती है, जिनमें रामचंदर के साथ बाकी लोगों को भी आमंत्रित किया जाता है। उसी पार्टी में इस मामले का पटाक्षेप होता है और फैसला जनता पर छोड़ दिया जाता है। फैसला जानने के लिए आपको नाटक देखना होगा। नाटक के जरिए बताया गया है कि आज भी जातिवाद एवं सामंतवादी सोच हर जगह विद्यमान है, जो समाज और व्यवस्था को खोखला कर रही है।
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नाटक के संवाद और कलाकारों की दमदार प्रस्तुति दर्शकों को आखिरी तक बांधे रखती है। बचाव पक्ष की तरफ सेना की एडवोकेट अपनी दलीलें इस तरह से रखती है कि जैसे किसी फिल्म का सीन चल रहा है। रामचंदर की सिसकियां दर्शकों को भावुक कर देती हैं। पूरे भवन में सन्नाटा छा जाता है। साउंड, सैनिकों के कदमताल, जिरह-दलील और कर्नल सूरत सिंह के जोशीले संवाद बाल भवन को सेना के एक कोर्ट मार्शल की कार्रवाई में बदल देते हैं। अंतिम दिन मुख्य अतिथि के तौर पर एडवाइजर मनोज परिदा और उनकी पत्नी लिपि परिदा मौजूद रहीं। इस मौके पर उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी नहीं बल्कि कल्चर्ड स्मार्ट सिटी है। उन्होंने नाटक और उनके कलाकारों के अभिनय की खुलकर तारीफ की और कहा कि नाटक के माध्यम से ही मजबूत संदेश दिए जा सकते हैं। इस मौके पर चंडीगढ़ भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद, पूर्व मेयर आशा जसवाल, पूर्व मेयर हरजिंदर कौर, पार्षद सुनीता धवन, राहुल महाजन सहित शहर के कई गणमान्य मौजूद रहे। नाटक में मुख्य भूमिका गुरप्रीत सिंह, विक्रांत सेठ, शरणजीत सिंह, सौरभ शर्मा, आशीष शर्मा, वर्षा, नवदीप बाजवा, नवदीप संधू, पुनीत भाटिया, हरविंदर सिंह, शुभम, गौरव ने निभाईं।
हरजिंदर कौर ने जिंदा रखी परपंरा, खूब हुई तारीफ
एक महीने से चल रहे टीएफटी के सफल आयोजन के लिए हर किसी ने हरजिंदर कौर को श्रेय दिया। उन्होंने थियेटर की संस्कृति को जिंदा रखा है। समाप्ति पर उन्होंने कहा कि अगली बार यह आयोजन इंटरनेशनल स्तर का होगा। इस मौके पर आए दर्शकों ने हरजिंदर कौर की तारीफ की। इसके अलावा टीएफटी के आयोजन में राहुल महाजन, सर्वप्रिय निर्मोही सुदेश शर्मा, मदन गुप्ता सपाटू, साधना संगर, करण शर्मा, सौरभ शर्मा, हरविंदर सिंह शैंटी, शुभाशीष नियोगी, दीपक अरोड़ा, जसकंवल कौर, ईश्वर दयाल, अनीता शबदीश, यूनीक सोसाइटी आफ आर्ट, वी ग्रुप का भी अहम रोल रहा। ट्रिपल सेवन ने सोशल मीडिया का काम संभाला।
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