पीएम नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान के सपने में मुख्यमंत्रियों की दिलचस्पी नहीं है। अभियान को लेकर हुई बैठक में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ। नीति आयोग के तहत गठित दस मुख्यमंत्रियों के उप समूह की चंडीगढ़ में आयोजित बैठक फेल हो गई।
विज्ञापन
बैठक में दस मुख्यमंत्रियों में से केवल तीन ने ही शिरकत की। मेजबान हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के अलावा नौ राज्यों के मुख्यमंत्रियों को इस बैठक का न्योता था।
उप समूह के चेयरमैन चंद्रबाबू नायडू के अलावा महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और मिजोरम के मुख्यमंत्री लालथनहवला ही बैठक में पहुंचे जबकि अन्य राज्यों दिल्ली, उत्तराखंड और कर्नाटक सरकारों ने अपने मंत्रियों को बैठक में भेजा।
विज्ञापन
वहीं बिहार और पश्चिम बंगाल ने मोदी के स्वच्छ भारत के सपने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और इन राज्यों से न तो सीएम और न ही अधिकारी ही बैठक में हिस्सा लेने पहुंचा।
अक्तूबर 2019 तक होगा पूरा भारत स्वच्छ
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और स्वच्छ भारत अभियान के तहत 10 प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों के उप समूह के संयोजक चंद्रबाबू नायडू ने उम्मीद जताई है कि अक्तूबर 2019 तक पूरा भारत स्वच्छ होगा।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए कचरे के निष्पादन में नवीनतम तकनीक का प्रयोग किया जाएगा और कचरे को उसके स्तर के हिसाब से अलग करके उससे बिजली बनाने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि इससे 50 फीसदी तक कचरे का समाधान हो जाएगा।
ठोस कचरे से बनाई जाए बिजली हरियाणा की मेजबानी में मंगलवार को चंडीगढ़ में हुई स्वच्छ भारत अभियान के 10 मुख्यमंत्रियों के उप समूह की बैठक में सभी एकमत थे कि वर्ष 2019 तक स्वच्छता मिशन का लक्ष्य हासिल करने के लिए सार्थक कदम उठाए जाएं और ठोस कचरे का उपयोग बिजली बनाने के लिए किया जाए।
मुख्यमंत्रियों का यह भी मानना था कि कचरे से उत्पादित बिजली को सांकेतिक (नोशनल) आय मानते हुए केंद्र सरकार को केंद्रीय करों में और राज्यों को वैट में छूट देनी चाहिए। उप-समूह के संयोजक और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में हुई बैठक में नायडू ने अभियान को सफल बनाने के लिए राज्यों के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि ठोस व तरल कचरे का प्रबंधन आज कई देशों की समस्या बन गया है।
20000 टन कचरे से 200 मेगावाट बिजली पैदा हो सकती
भारत में इस पर अन्य देशों के मुकाबले देरी से ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि 20000 टन कचरे से 200 मेगावाट तक बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। केंद्रीय बिजली विनियामक आयोग और राज्य बिजली विनियामक आयोगों को टैरिफ दरें निर्धारित करने की पहल करनी चाहिए।
बैठक में मौजूद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कचरा प्रबंधन की प्रौद्योगिकी स्थानीय निकायों पर थोपी नहीं जानी चाहिए। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए मेयर व पार्षदों को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक कचरे की रिसाइकिलिंग पर प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।
बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के संयुक्त सचिव सरस्वती प्रसाद, शहरी विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव प्रवीन प्रकाश और हाउसिंग एवं शहरी गरीबी उन्मूलन मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजीव रंजन मिश्रा ने मिशन पर अपने मंत्रालयों की प्रस्तुतियां दीं। इस मौके पर हरियाणा के कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री ओम प्रकाश धनखड़, राव नरबीर सिंह, सिन्धुश्री खुल्लर, डीएस ढेसी, आरके खुल्लर, डॉ. अभिलक्ष लिखी, भूपेश्वर दयाल के अलावा महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, सिक्किम व पश्चिम बंगाल के वरिष्ठ अधिकारी भी थे।
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश में स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने के लिए गांव को पूरी तरह ‘खुले में शौच’ मुक्त कराने वाली पंचायतों और ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन में बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों को 5-5 लाख रुपये के पुरस्कार देने की दो नई योजनाओं की घोषणा की।
मुख्यमंत्री खट्टर ने यह ऐलान मंगलवार को हरियाणा निवास में नीति आयोग के तहत गठित मुख्यमंत्रियों के उप-समूह की दूसरी बैठक को संबोधित करते हुए किया। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई को संस्कार को रूप में विकसित करना होगा। इसके लिए हरियाणा के स्कलों में प्राइमरी स्तर से ही पाठ्यक्रम में स्वच्छता विषय को शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड के नियमों में संशोधन करने, कचरे के रिसाइकिलिंग को आर्थिक प्रोत्साहन देने और गोबर जैसे जैव अपशिष्टों से बनी कंपोस्ट खाद के विपणन की सुविधाएं बढ़ाने के साथ-साथ कूड़ा-कचरा बीनने वाले श्रमिकों को संस्थागत रूप देने की जरूरत पर दिया।
गांवों में बने भूमिगत ड्रेनेज सिस्टम: पाटिल कर्नाटक के ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री एचके पाटिल ने कहा कि शौचालय व स्नानगृह एक साथ बनाए जाने चाहिए और गांवों में गंदे पानी की निकासी के लिए भूमिगत ड्रेनेज सिस्टम जरूरी है, तभी दो करोड़ शौचालय बनाने के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मिशन में फंड की कमी नहीं होनी चाहिए।
स्वच्छता मिशन के लिए लगाएं उपकर उत्तराखंड के चिकित्सा स्वास्थ्य, आयुष व आयुष शिक्षा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत मिलने वाले सहयोग को प्रधानमंत्री राहत कोष के तहत आयकर मुक्त करना चाहिए। इसके अलावा शिक्षा की तरह मिशन के लिए भी उपकर लागू किया जाए।
सौ फीसदी घरों में बनेंगे शौचालय : ललथनहवला मिजोरम के मुख्यमंत्री ललथनहवला ने कहा कि मिजोरम में 80 फीसदी घरों में शौचालय हैं। वर्ष 2015-16 के दौरान शत-प्रतिशत घरों में शौचालय का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चाधिकार प्राप्त कमेटी का गठन किया गया है। मिशन को सफल बनाने में मिजोरम पूरा सहयोग देगा।