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चंडीगढ़ को आज तक नहीं मिली महिला सांसद

Wed, 12 Mar 2014 01:03 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, चंडीगढ़
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शहर में महिला मतदाताओं की संख्या भले ही 2.65 लाख से अधिक हो, लेकिन इसके बाद भी शहर के राजनीति के मैदान से महिलाएं लगभग गायब रहती हैं। आंकड़े तो कुछ यहीं बयां कर रहे हैं।
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चंडीगढ़ में अब तक 12 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं। लेकिन, किसी भी बड़े राजनीतिक दल ने अभी तक महिला को उम्मीदवार नहीं बनाया है।

चंडीगढ़ में 12 बार लोकसभा चुनाव हुए। इसमे केवल 12 महिलाओं ने ही चुनाव लड़ा। चार बार तो लोकसभा चुनाव में एक भी महिला चुनाव मैदान में नहीं उतरी।

इस साल लोकसभा चुनाव में बसपा के बाद आम आदमी पार्टी (आप) ने महिला को उम्मीदवार बनाया तो शहर वासियों को लगा कि इस बार का लोकसभा चुनाव थोड़ा अलग होगा। लेकिन, आप की उम्मीदवार सविता भट्टी ने टिकट लौटा दिया।

अब अगर आप फिर से किसी महिला को टिकट देती है तो शहर में ऐसा पहली बार होगा जब दो राजनीतिक दलों की उम्मीदवार महिलाएं होंगी। साथ ही कुछ महिलाएं निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी नामांकन दाखिल कर सकती हैं।
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1967 में हुआ था पहली बार चुनाव
चंडीगढ़ में पहली बार 1967 में चुनाव हुआ था और उसके बाद 1971 में चुनाव हुआ। इन दोनों सालों में किसी भी महिला ने चंडीगढ़ से चुनाव नहीं लड़ा।

पहली बार चंडीगढ़ से 1977 में सीपीआई ने महिला उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारा। शीला देवी इस साल चुनाव में खड़ी हुईं और उन्हें 2481 वोट मिले। इसके बाद 1980 में दो महिला उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा।

कांग्रेस (यू) की तरफ से पूर्व केंद्रीय मंत्री अंबिका सोनी ने चुनाव लड़ा और 8965 वोट हासिल किए, जबकि परमजीत कौर ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और 113 वोट हासिल किए। इसके बाद 1984 में दो महिला उम्मीदवारों ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा।

1989 में चंडीगढ़ से एक भी महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में नहीं उतरी। 1991 में एक महिला ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। इसके बाद 1996 में किसी महिला ने चुनाव नहीं लड़ा।

1998 और 1999 में दो दो महिलाओं ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। 2004 और 2009 में भी एक एक महिला उम्मीदवार ने चुनाव लड़ा।

ये रहीं उम्मीदवार
वर्ष 1977 -शीला दीदी- सीपीआई-2481
वर्ष 1980- अंबिका सोनी-आईएनसी (यू)-8965
परमजीत कौर-निर्दलीय-113
वर्ष 1984- जसवंत कौर-निर्दलीय-701
निर्मला-निर्दलीय-116
वर्ष 1989
कोई नहीं
वर्ष 1991
भजन कौर-निर्दलीय-546
वर्ष 1996
कोई नहीं
वर्ष 1998
बिमला (बसपा (ए))-1026
प्रकाश कौर-निर्दलीय-254
वर्ष 1999- बिमला (बसपा (ए))-411
पलकश्री-निर्दलीय-430
वर्ष 2004- रेखा शर्मा-निर्दलीय-481
वर्ष 2009- माया देवी-निर्दलीय-927

नगर निगम चुनाव में नहीं रहती हैं पीछे
चंडीगढ़ में लोकसभा चुनाव में तो महिला उम्मीदवार रुचि नहीं दिखाती हैं, लेकिन चंडीगढ़ में नगर निगम चुनावों में महिला उम्मीदवार भागी करने से पीछे नहीं रहती।

इसकी वजह है महिलाओं के लिए आरक्षित वार्ड। साथ ही पांच सालों में दो साल महिला के लिए मेयर का पद आरक्षित होता है।

नगर निगम चुनाव के बाद पहले और चौथे साल मेयर महिला को बनाया जाता है। 2011 में चुनाव के बाद 2012 में राजबाला मलिक मेयर बनीं थीं। अब अगले साल 2015 में भी महिला मेयर बनेगी।
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