चंडीगढ़। शहर में ई-रिक्शा की जैसे बाढ़ आ गई है। मुख्य रास्तों से लेकर अंदरूनी सड़कों पर ई-रिक्शा ही नजर आ रहे हैं। ये नियमों को भी तोड़ रहे हैं। कई ई-रिक्शा की कमान नाबालिगों के हाथ में पहुंच गई है। वह इन्हें लापरवाही और अनियंत्रित गति से सड़कों पर दौड़ा रहे हैं। हाल ही में एक नाबालिग ई-रिक्शा चालक ने मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर को टक्कर मार दी। उनकी मौत हो गई है। कई अन्य लोग भी इनकी वजह से हादसों का शिकार हो रहे हैं। भले ही रोजी-रोटी कमाने के लिए कई लोगों ने ई-रिक्शा डाल लिए हैं, लेकिन चलने वाले करीब 30 फीसदी ई-रिक्शा बिना रजिस्ट्रेशन के ही सड़कों पर दौड़ रहे हैं। कई ई-रिक्शा चालक नाबालिग हैं। गाड़ी पर नंबर प्लेट नहीं होती। ये नियम-कानून की परवाह किए बिना धड़ल्ले से गाड़ी चलाते हैं। हाल ही में चंडीगढ़ के मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर (एमवीआई) रविंदर सिंह को ड्यूटी के दौरान एक नाबालिग ई-रिक्शा चालक ने टक्कर मार दी थी, जिसमें उनकी मौत हो गई। अमर उजाला ने सोमवार को शहर के कई इलाकों में ई-रिक्शा चालकों की कार्यप्रणाली को देखा। पाया कि कई अधिकतर ई-रिक्शा चालक चप्पल पहन कर गाड़ी चला रहे थे। उनकी कोई वर्दी भी नहीं है। न कोई स्टैंड है। जहां मन करता है वहां गाड़ी रोकते हैं। जिन ई-रिक्शा पर नंबर नहीं होते वो लालबत्तियों की भी परवाह नहीं करते। सुरक्षा की दृष्टि से भी यह ई-रिक्शा खतरनाक हैं। छोटे से गड्ढे की वजह से भी पलट जाते हैं। ऐसे में सवारियों को काफी ज्यादा चोट लगती है।
शौक पूरा करने-पैसा कमाने को नाबालिग भी चला रहे ई-रिक्शा : ई-रिक्शा का चलन बढ़ने से इसका दुरुपयोग भी बढ़ गया है। लालच में इसकी कमान अभिभावकों ने नाबालिगों के हाथों में थमा दी है। कुछ नाबालिग शौक पूरा करने व पैसा कमाने को ई-रिक्शा चला रहे हैं। यह रिक्शा को अनियंत्रित गति व लापरवाही व बिना किसी डर के दौड़ा रहे हैं। इससे सवारियों को ही नहीं अन्य वाहनों व राहगीरों को भी दुर्घटना होने का खतरा बना रहता है। ई-रिक्शा सस्ते मिलते हैं और लोन पर भी उपलब्ध हैं। इसलिए काफी संख्या में लोगों ने खरीद लिए हैं। कोई रोक टोक भी नहीं है और चलाने के लिए पेट्रोल, डीजल या गैस की जरूरत नहीं पड़ती। इसे बस चार्ज करने के बाद आसानी से पूरे दिन चलाया जाता है। यही कारण है कि संख्या बढ़ती जा रही है।