पंजाब में अब भ्रष्टाचार के केसों में फंसे और विजिलेंस एवं विभागीय जांचों का सामना कर रहे अधिकारियों व कर्मचारियों को सेवाकाल में बढ़ोतरी नहीं मिलेगी।
58 साल की सेवा पूरी होने के बाद मिलने वाली एक साल की एक्सटेंशन का लाभ अब वह नहीं ले सकेंगे। पंजाब सरकार के एक प्रवक्ता ने इस बारे में बताया कि यह फैसला मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने उप मुख्यमंत्री सुखबीर बादल की सलाह पर किया है।
इस बारे में मुख्य सचिव ने समस्त विभागों के प्रबंधकीय सचिवों को आदेश जारी करते हुए अपने यहां के ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों की सूची बनाने को कहा है, जिनके नाम भ्रष्टाचार के किसी केस में शामिल हैं या वे विजिलेंस या विभागीय जांच का सामना कर रहे हैं।
इस संबंध में प्रत्येक विभाग की तीन सदस्यीय कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें प्रबंधकीय सचिव, निदेशक एवं विभाग का एक अन्य अधिकारी शामिल हाेंगे। यह कमेटी सेवाकाल में बढ़ोतरी के केसों की जांच करके यह सुनिश्चित करेगी कि भ्रष्टाचार मामलों में फंसे और विजिलेंस एवं विभागीय पड़तालों का सामना कर रहे अधिकारियों, कर्मचारियों को एक्सटेंशन न मिल सके।
बता दें कि पंजाब सरकार ने 2012 में सेवाकाल में बढ़ोतरी की स्कीम आरंभ की थी, जिसके तहत 58 वर्ष की आयु पर सरकारी अधिकारी, कर्मचारी को एक वर्ष या दो वर्ष की एक्सटेंशन दी जाती थी।
सरकार ने 8 अक्तूबर 2012 एवं 22 जनवरी 2013 को जारी नोटिफिकेशन में संशोधन करते हुए दागी कर्मचारियों को 58 वर्ष की आयु के बाद सेवाकाल में वृद्धि न देने के निर्देश दिए हैं। प्रवक्ता ने कहा कि पंजाब सरकार राज्य वासियों को स्वच्छ सेवाएं देने के लिए वचनबद्ध है।