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मंत्रिमंडल में विस्तार को लेकर CM कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किया बड़ा खुलासा

Sun, 04 Jun 2017 02:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कैप्टन अमरिंदर सिंह
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पंजाब मंत्रिमंडल में फिलहाल विस्तार के कोई आसार नहीं हैं। वहीं विस्तार को लेकर मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बड़ा खुलासा किया है। पंजाब मंत्रिमंडल से फिलहाल न तो कोई मंत्री बाहर होगा और न ही कैबिनेट में कोई नया चेहरा शामिल होगा।
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से हुई मुलाकात का फिलहाल कोई नतीजा नहीं निकला है। रेत की खदानों के संबंध में आरोपों से घिरे सिंचाई मंत्री राणा गुरजीत सिंह को जांच पूरी होने तक कैबिनेट से फिलहाल नहीं हटाया जाएगा। मंत्रिमंडल के विस्तार के लिए भी प्रस्तावित नामों पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं हो पाया है।

राहुल से कैप्टन की मुलाकात को पंजाब में भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घिरी सरकार पर बढ़ते दबाव के तौर पर देखा जा रहा था। समझा जाता है कि पार्टी ने एक बार फिर फैसला पूरी तरह से कैप्टन पर छोड़ दिया है। कैप्टन ने पार्टी नेतृत्व को आश्वस्त किया है कि अगर जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो वह कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे।
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विस्तार का फैसला समय आने पर कर लिया जाएगा

मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
राहुल से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में कैप्टन ने कहा कि मंत्रिमंडल के प्रस्तावित विस्तार का फैसला समय आने पर कर लिया जाएगा और सूचना दे दी जाएगी। कैप्टन ने रेत खदान मामले की जांच कर रहे जस्टिस नारंग की ईमानदारी पर सवाल उठाने वाले आप विधायक सुखपाल खैहरा की आलोचना की।

उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्री राणा गुरजीत सिंह के परिवार का जस्टिस नारंग से कोई संबंध नहीं है। रेत की खदानों की बोली के संबंध में लगे आरोपों की जांच करने वाले सेवानिवृत्त जस्टिस जे एस नारंग की ईमानदारी और योग्यता पर सवाल नहीं उठाने चाहिए।

राहुल गांधी के साथ हुई मुलाकात को सामान्य बैठक बताते हुए कैप्टन ने कहा कि यह बैठक करीब एक महीने बाद हुई है। दिल्ली में अपने दौरे के दौरान में कांग्रेस उपाध्यक्ष से मिलने पहुंचा। उन्होंने सिंचाई और बिजली मंत्री राणा गुरजीत सिंह पर लगे आरोपों और विवाद के संबंध में कहा कि उन पर रेत खदान लेने का आरोप लगा है।

सरकार इसकी न्यायिक जांच करा रही है। इस संबंध में फैसले से पूर्व हमें इस जांच रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई जज किसी का रिश्तेदार है या किसी से उसके पेशेवर संबंध हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि उसकी ईमानदारी पर सवाल उठाया जाए।
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