कल लोग बस में सफर नहीं कर पाएंगे, इसलिए ये खबर पढ़ने के बाद ही घर से बाहर निकलें। वरना दिन भर परेशानी उठानी पड़ेगी और भटकते रहेंगे। हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी एक बार फिर सरकार से टकराने को तैयार हैं।
परिवहन नीति-2017 के तहत आवंटित परमिट पर विभिन्न जिलों में निजी बसों का संचालन जारी रहने से नाराज रोडवेज कर्मियों ने प्रदेशव्यापी हड़ताल का एलान कर दिया है। पांच जून को प्रदेश में रोडवेज बसों का चक्का जाम रहेगा। चार जून की रात 12 बजे के बाद बसों का संचालन बंद कर दिया जाएगा।
सरकार के कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करने से रोडवेज कर्मी एक दिन की हड़ताल को अनिश्चितकालीन करने की भी तैयारी में हैं। रोडवेज के बेड़े में अभी चार हजार बसें हैं, जिनमें से लगभग 3600 बसें ही सड़कों पर दौड़ रही हैं। पांच जून को इनमें से एक भी बस सड़कों पर नहीं उतरेगी। रोडवेज की आठों यूनियन की रोडवेज बचाओ संघर्ष समिति ने इसका निर्णय शनिवार को ले लिया।
बार-बार विश्वासघात से आहत : समिति
Haryana Roadways strike
रोडवेज बचाओ संघर्ष समिति में शामिल यूनियनों के प्रांतीय नेता इंद्र सिंह बधाना, विरेंद्र धनखड़, सरबत पूनिया, आजाद सिंह मलिक, बलराज देशवाल, हरिनारायण शर्मा, अनूप सहरावत, दलबीर किरमारा व बाबू लाल यादव ने कहा कि निजी रूट परमिट और परिवहन नीति रद्द कराने के लिए कर्मचारी दो महीने से आंदोलनरत हैं, लेकिन सरकार बार-बार उनके साथ विश्वासघात कर रही है। सरकार ने नई परिवहन नीति बनाने तक निजी बस ऑपरेटरों को बसें चलाने की छूट दे रखी है, जो उन्हें किसी सूरत में स्वीकार नहीं है।
रोडवेज के चक्का जाम से जुड़े अहम बिंदु
. सभी 19600 कर्मचारी निजीकरण के खिलाफ एकजुट
. जींद, सिरसा, हिसार, अंबाला, कुरुक्षेत्र डिपुओं में हड़ताल के बाद राज्यव्यापी चक्का जाम की घोषणा
. 10 से 13 अप्रैल 2017 तक इसी मुद्दे पर हो चुका चक्का जाम
. चक्का जाम से रोडवेज को प्रतिदिन चार करोड़ से अधिक का नुकसान