एनआईटीटीटीआर की जांच में बिटुमेन और मोटाई के मानक सही, रिपोर्ट आने के बावजूद मरम्मत में देरी पर उठे सवाल
नगर निगम चीफ इंजीनियर संजय अरोड़ा ने मांगी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट, ठेकेदार के भुगतान की भी होगी जांच
चंडीगढ़। सेक्टर-27 डी की वी-6 सड़क के छह स्थानों पर ऊंचे-नीचे हिस्सों को खुरचकर पैचवर्क कराने को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता देवेंदर सिंह बबला और उनके भांजे रोबिन के बीच हाथापाई हो गई थी। अब सड़क की जांच रिपोर्ट में बिटुमेन और मोटाई के मानक सही पाए गए हैं। नगर निगम चीफ इंजीनियर संजय अरोड़ा ने अखबारों में प्रकाशित खबरों के आधार पर सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर (बीएंडआर) से फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट मांगी है।
नवंबर 2024 में सड़क की सतह खुरचकर रिकॉर्पेटिंग की गई थी। जांच के लिए नगर निगम ने एनआईटीटीटीआर को 60,272 रुपये फीस दी थी। रिपोर्ट 29 दिसंबर 2025 को आ गई थी। इसमें ओपन ग्रेडेड प्रीमिक्स और बिटुमिनस कंक्रीट की जांच की गई। बिटुमेन की निर्धारित मात्रा 5.5 प्रतिशत के मुकाबले औसतन 5.504 प्रतिशत मिली। वहीं, सड़क की मोटाई 30 मिमी के मानक के मुकाबले 30.4 मिमी और घनत्व 2.323 ग्राम प्रति घन सेंटीमीटर दर्ज किया गया।
रिपोर्ट के बावजूद मरम्मत में देरी क्यों?
जांच रिपोर्ट के अनुसार, सड़क किनारे बनी रोड गलियों का स्तर ऊंचा होने से पानी की निकासी बाधित हुई। स्कारिफाई करने के बाद पुरानी और नई सतह का सही मिलान नहीं होने से सड़क ऊंची-नीची हो गई। सड़क पर टेंट गाड़ने से बने छेदों के जरिये पानी अंदर जाने से भी सड़क क्षतिग्रस्त हुई। रिकॉर्पेटिंग के टेंडर में रोड गलियों को दोबारा बनाने का प्रावधान नहीं था। रिपोर्ट की प्रति मैसर्स अग्रवाल कंस्ट्रक्शन कंपनी को भी दी गई, जिसने छह स्थानों पर दोबारा पैचवर्क कराया। अब निगम यह भी जांचेगा कि ठेकेदार को पहले पूरा भुगतान किया गया था या नहीं। रिपोर्ट दिसंबर 2025 में आने के बावजूद मरम्मत में देरी क्यों हुई, इसे भी फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।