पांच बसों की पड़ताल में खुली सुरक्षा व्यवस्था की पोल, दो-दो साल पुराने अग्निशामक यंत्रों पर एक्सपायरी डेट गायब300 के करीब बसें रोजाना चंडीगढ़ से यात्रियों को लेकर जा रहीं दूसरे राज्यों में, इमरजेंसी विंडो और एग्जिट गेट लॉकड्राइवर-कंडक्टर को आपात स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण तक नहीं
चंडीगढ़। सैकड़ों किलोमीटर का सफर, लग्जरी बसों का चमचमाता बाहरी लुक और अंदर सुरक्षा के नाम पर लापरवाही। चंडीगढ़ से रोजाना करीब 300 अवैध निजी बसें यात्रियों को लेकर देश के अलग-अलग राज्यों में दौड़ रही हैं लेकिन इनमें आपात स्थिति से निपटने के इंतजाम तक नहीं हैं। यात्रियों की जान जोखिम में डालकर चल रही इन बसों पर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (एसटीए) की निगरानी भी सवालों के घेरे में है। क्या विभाग किसी बड़े हादसे के बाद जागेगा?
इमरजेंसी विंडो और एग्जिट गेट तक लॉक
अमर उजाला ने ट्रिब्यून चौक और सेक्टर-43 बस स्टैंड के सामने पेट्रोल पंप पर खड़ी पांच बसों की पड़ताल की तो कई गंभीर खामियां सामने आईं। बसों में प्रवेश और बाहर निकलने के लिए मुख्य गेट ही एकमात्र रास्ता है। 40 सीटों वाली बस की संकरी गैलरी में एक समय में केवल एक यात्री निकल सकता है। सामने से दूसरा यात्री आने पर रास्ता बाधित हो जाता है। इमरजेंसी विंडो भी लॉक मिलीं। पीछे की ओर निकास के नाम पर छोटी खिड़की है, जो पर्दों से ढकी और अंदर से बंद रहती है। ऐसे में आग या किसी अन्य आपात स्थिति में यात्रियों के सुरक्षित बाहर निकलने पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
दो-दो साल पुराने अग्निशामक यंत्र, एक्सपायरी डेट गायब
पड़ताल में बसों में लगे अग्निशामक यंत्र दो-दो साल पुराने मिले। इन पर एक्सपायरी डेट भी नहीं थी। इन्हें ड्राइवर या कंडक्टर की सीट के पास रखने के बजाय अधिकतर बसों में आखिरी सीट के नीचे रखा गया था। हादसे के समय जरूरत पड़ने पर इन्हें निकालना मुश्किल हो सकता है।
ड्राइवर-कंडक्टर बोले, प्रशिक्षण किस बात का?
सेक्टर-43 बस स्टैंड के सामने पेट्रोल पंप के पास खड़ी एक बस के ड्राइवर और कंडक्टर से आपात स्थिति में अग्निशामक यंत्र इस्तेमाल करने और प्रशिक्षण के बारे में पूछा गया। कंडक्टर कैलाश (बदला हुआ नाम) ने कहा कि इसकी जरूरत नहीं पड़ी, हादसा होगा तो देखा जाएगा। प्रशिक्षण के सवाल पर उसने कहा कि ऐसा कौन-सा प्रशिक्षण होता है, जो होना होगा, वह होगा ही।
एसटीए की निगरानी पर सवाल
पांच बसों की पड़ताल में सामने आई खामियां यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती हैं। सैकड़ों किलोमीटर तक सफर कराने वाली इन बसों में आपात निकास और अग्निशमन के इंतजाम दुरुस्त होना जरूरी है। अब सवाल है कि एसटीए ऐसी बसों के खिलाफ कार्रवाई कब करेगा और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कब कदम उठाए जाएंगे।
ये होता है नियम
सरकारी नियमों के अनुसार निजी लग्जरी बसों के ड्राइवरों और कंडक्टरों को आपातकाल में अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) चलाने और आपातकालीन निकासी की ट्रेनिंग अनिवार्य है। परिवहन विभाग और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारियों की ओर से समय-समय पर निजी ट्रैवल ऑपरेटरों को अपने स्टाफ के लिए प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं। - सतिंदर सिंह, वाइस प्रेसीडेंट, गवर्नमेंट वर्कर यूनियन ट्रांसपोर्ट चंडीगढ़
नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रवर्तन विभाग नियमित रूप से कार्रवाई कर रहा है। - नीतिश सिंगला, सचिव, स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी