ट्राइसिटी में हाइड्रो टेस्टिंग सेंटर नहीं होने के कारण कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) वाहन बिना टेस्टिंग के सड़कों पर बेखौफ दौड़ रहे हैं। सिलिंडर टेस्टिंग नहीं होने के कारण हमेशा गैस लीकेज का खतरा बना रहता है, जो कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकता है। जानकारों के मुताबिक ऐसे छोटे-बड़े वाहनों की संख्या करीब 13000 है।
दिल्ली के बाद अब चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब में भी सीएनजी को सरकारें खूब प्रमोट कर रही हैं। इसी का नतीजा है कि पिछले कुछ साल में यहां सीएनजी पंपों की संख्या बढ़कर 16 तक पहुंच गई है। इसके बाद भी अभी तक ट्राइसिटी में एक भी हाइड्रो टेस्टिंग सेंटर नहीं खोला गया है। इसके कारण यहां बिना टेस्ट किए हुए सीएनजी सिलिंडर, वाहन चालकों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
टेस्टिंग नहीं होने से यह भी पता नहीं चल पाता है कि वाहनों में लगा सिलिंडर उपयोग के लिए सही है या नहीं। इसके साथ ही हाईप्रेशर की सीएनजी से हमेशा सिलिंडर फटने का भी खतरा बना रहता है। ट्राइसिटी में अब तक सीएनजी का उपयोग करने वाले वाहनों की संख्या बढ़कर करीब 13000 हो गई है। जिम्मेदार विभाग इस समस्या को स्वीकार तो कर रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर शीघ्र प्रस्ताव प्रशासन को भेजे जाने की बात कह रहे हैं।
सीएनजी वाहनों की हर तीन साल पर हाइड्रो टेस्टिंग अनिवार्य है। ट्राइसिटी में कोई सेंटर नहीं होने के कारण यह दिक्कत आ रही है। जल्द ही प्रशासन को इसके लिए एक प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा।
- हरजीत संधू, एडिशनल सेक्रेटरी, ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट