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Chandigarh News: गवर्नर हाउस कूच पर रोक नहीं, चंडीगढ़ में अभेद सुरक्षा घेरा

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चंडीगढ़। स्वतंत्रता दिवस पर शनिवार को चंडीगढ़ की सड़कों पर तिरंगे के जश्न के साथ सुरक्षा की सबसे बड़ी परीक्षा भी होगी। कौमी इंसाफ मोर्चे ने गवर्नर हाउस घेराव की कॉल दी है और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगाने से इन्कार दिया है। ऐसे में एक तरफ शहर में स्वतंत्रता दिवस समारोहों की सुरक्षा होगी तो दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों को चंडीगढ़ में प्रवेश से रोकने की चुनौती। पुलिस ने इसके लिए चंडीगढ़-मोहाली सीमा समेत शहर के प्रमुख प्रवेश मार्गों पर अभेद सुरक्षा घेरा तैयार किया है। करीब 4,500 पुलिसकर्मी और केंद्रीय बलों की आठ कंपनियां मोर्चा संभालेंगी।
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बॉर्डर पर ही रोकने की रणनीति, 29 जुलाई से लिया सबक
पुलिस ने इस बार प्रदर्शनकारियों को शहर के भीतर पहुंचने देने के बजाय बॉर्डर पर ही रोकने की रणनीति बनाई है। 29 जुलाई को वारिस पंजाब दे के समर्थकों के प्रदर्शन के दौरान कई बैरिकेड पार कर प्रदर्शनकारी चंडीगढ़ में दाखिल हो गए थे और राजभवन के नजदीक तक पहुंच गए थे। बैरिकेड टूटने के बाद पुलिस को भीड़ नियंत्रित करने में मशक्कत करनी पड़ी थी। प्रदर्शन के दौरान 15 पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात सामने आई थी। इसी अनुभव को देखते हुए चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर बहुस्तरीय बैरिकेडिंग की गई है। पंजाब की तरफ से आने वाले जत्थों पर विशेष नजर रहेगी। मोहाली, रोपड़, पंचकूला और सोलन पुलिस के साथ समन्वय कर संभावित रास्तों और प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है। संदिग्ध वाहनों की जांच भी बढ़ाई गई है।
पुलिस के हर विंग को मैदान में उतारा
एसएसपी कंवरदीप कौर के अनुसार करीब 4,500 पुलिसकर्मियों को सुरक्षा ड्यूटी में लगाया गया है। केंद्रीय बलों की आठ कंपनियां भी तैनात रहेंगी। पुलिस के विभिन्न विंग के अलावा डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की चालानिंग ब्रांच के नौ कर्मचारी, एमटी सेक्शन और डॉग स्क्वॉड को भी सुरक्षा व्यवस्था में शामिल किया गया है। स्वतंत्रता दिवस समारोह स्थलों, सरकारी भवनों, प्रमुख बाजारों, बस स्टैंड और अन्य संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा रहेगी। सीसीटीवी और ड्रोन के जरिये भीड़ की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी। वरिष्ठ अधिकारी लगातार सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेंगे।
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हाईकोर्ट ने कहा- प्रदर्शन करें, लेकिन व्यवस्था न बिगड़े
कौमी इंसाफ मोर्चे के गवर्नर हाउस घेराव के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रदर्शन पर रोक लगाने से इन्कार किया। अदालत ने साफ किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है लेकिन कानून-व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। अदालत ने चंडीगढ़ प्रशासन और पंजाब सरकार को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता विवेक सिंगला ने बड़ी संख्या में समर्थकों के चंडीगढ़ पहुंचने से कानून-व्यवस्था, यातायात और आपातकालीन सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई थी। स्वतंत्रता दिवस के कारण पहले से कड़ी सुरक्षा व्यवस्था का भी हवाला दिया गया। प्रशासन और पंजाब सरकार ने अदालत को सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम का भरोसा दिया।
सात महीने में 154 प्रदर्शन, 18 बड़े
पुलिस आंकड़ों के मुताबिक 2026 के पहले सात महीनों में चंडीगढ़ में 154 प्रदर्शन हो चुके हैं। इनमें 18 बड़े स्तर के रहे। प्रदर्शनों के दौरान 27 पुलिसकर्मी घायल हो चुके हैं। बीते 10 जुलाई को संयुक्त किसान मोर्चे के बैनर तले किसानों की बड़ी जुटान और 20 जुलाई को अकाली दल के प्रदर्शन से भी शहर के कई मार्ग प्रभावित हुए थे।
20 अगस्त को मांगी स्थिति रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त को तय की है। दोनों पक्षों को तब तक प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। फिलहाल पुलिस के सामने चुनौती दोहरी है स्वतंत्रता दिवस समारोहों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना और प्रदर्शनकारियों को शहर में प्रवेश से रोकते हुए कानून-व्यवस्था बनाए रखना।
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