साल 1996 से पहले रिटायर्ड सैनिकों के एरियर की मांग फिलहाल मंजूर नहीं हुई है। आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) ने अपने फैसले में कहा कि सिर्फ उन लोगों को ही छह महीने का एरियर मिल सकता है, जिन्होंने पहली बार याचिका दायर की थी। यदि उनकी याचिका सरकार की बढ़ी पेंशन के बाद की होगी, तो उन्हें कोई नुकसान नहीं झेलना पड़ेगा।
कुल मिलाकर सैनिकों को फिलहाल खास फायदा नहीं हुआ। सरकारी एडवोकेट व पूर्व कैप्टन संदीप कुमार बंसल ने कहा कि सरकार की ओर से इन सैनिकों को पहले से ही रियायत दी जा रही थी।
साल 2013 में सरकार ने दोबारा से सैनिकों की पेंशन बढ़ा दी थी। मंत्रालय की ओर से पूर्व सैनिकों को काफी राहत दी जा रही है। यह फैसला जस्टिस राजेश चंद्रा और एनएस बराड़ की बेंच ने सुनाया।
साल 1996 से पहले रिटायर्ड सैनिक एरियर की मांग कर रहे थे। उनकी मांग थी कि साल 1996 से लेकर एक सात 2009 तक उन्हें बढ़ी पेंशन का एरियर दिया जाए। दरअसल 1996 के बाद के रिटायर्ड सैनिकों को बढ़ी हुई पेंशन का लाभ मिलने लगा था।
बाद में साल 2010 में सरकार की ओर से फैसला आया कि 1996 से पहले रिटायर्ड सैनिकों को सात जुलाई 2009 से बढ़ी पेंशन दी जाए। इस तारीख से उन्हें बढ़ी पेंशन मिलने लगी।
इस फैसले से पूर्व सैनिक खुश तो हुए, लेकिन उन्होंने एरियर की मांग भी की। इसके लिए उन्होंने चंडीगढ़ ट्रिब्यूनल में 249 लोगों ने केस दायर किया। यह केस खारिज कर दिया।
उसके बाद फिर से कुछ पूर्व सैनिकों ने एएफटी में केस डाला। इसमें 52 पिटीशन थी, जिसमें करीब 100 सैनिक शामिल थे।
इस केस की सुनवाई करते हुए एएफटी ने कहा कि सिर्फ उन्हें छह महीने का एरियर मिल सकता है, जिनकी पहली बार याचिका आई होगी। यदि उनकी याचिका सरकार के फैसले के बाद की होगी, तो उन्हें फिलहाल कोई नुकसान नहीं होगा।