हरियाणा के 14 हजार नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) कर्मियों को बड़ा झटका लगा है। अब इन अनुबंध कर्मियों को वार्षिक वेतन वृद्धि, एचआरए, मेडिकल व महंगाई भत्ता नहीं मिलेगा। सरकार ने सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बजाय फिक्स वेतन देने का फैसला लिया है। इससे गुस्साए एनएचएम कर्मचारियों ने 30 जून से हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है।
बीते एक जून को वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टीवीएसएन प्रसाद की अध्यक्षता में सिविल सचिवालय में बैठक हुई थी। उसमें नेशनल हेल्थ मिशन के निदेशक, एचआर परामर्शदाता, निदेशक वित्त एवं लेखा व विधि अधिकारी एनएचएम शामिल हुए थे। जिसमें वेतन फिक्स करने का फैसला लिया गया।
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने चार साल पहले लागू हुए बायलॉज को खत्म कर वेतन फिक्स करने के फैसले की आलोचना की है। उन्होंने एनएचएम कर्मियों के प्रदेशव्यापी आंदोलन का पुरजोर समर्थन का एलान किया है। संघ के राज्य प्रधान सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी ने कहा कि यह निर्णय कर्मचारियों को किसी सूरत में स्वीकार नहीं है।
सरकार के इस फैसले के विरोध में बहुउद्देशीय स्वस्थ्य कर्मचारी एसोसिएशन ने 24 मई को पंचकूला स्थित मिशन निदेशक के कार्यलय पर प्रदर्शन किया था। संघ हरियाणा सरकार को समान काम-समान वेतन की परिभाषा कई बार स्पष्ट कर चुका है। नियम कर्मी को जो वेतन-भत्ते एवं अन्य सुविधाएं मिलती हैं, वे सभी अनुबंधित कर्मचारियों को भी दी जाएं। लेकिन सरकार अनुबंधित कर्मियों को केवल ग्रेड का एंट्री लेवल वेतन ही देना चाहती है।
लांबा ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मांग की है कि सभी अनुबंधित कर्मचारियों को तुरंत नीति बनाकर पक्का किया जाए। साथ ही एनएचएम कर्मियों को पहले की तरह सभी लाभ मिलें। उन्होंने कहा कि एनएचएम कर्मचारी संघ हरियाणा ने पत्र लिखकर सर्व कर्मचारी संघ से सहयोग मांगा है, इसलिए 30 जून को सभी जिलों में संघ पदाधिकारी धरना स्थल पर जाकर एनएचएम कर्मियों के साथ एकजुटता प्रकट कर वेतन को फिक्स करने का विरोध करेंगे।