चंडीगढ़। शहर में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने का मामला सामने आया है। कैंबवाला निवासी पियूष राणा ने पुलिस कंट्रोल रूम को कॉल कर बताया कि एक संदिग्ध स्कॉर्पियो गलत साइड से आकर उसकी गाड़ी और उसे टक्कर मारकर भाग गई। पीड़ित ने गाड़ी की वीडियो के जरिये गाड़ी का नंबर भी उपलब्ध कराया और कहा कि यह संदिग्ध लग रही है। इसके बावजूद पुलिस ने न तो गाड़ी ट्रेस की और न ही आरोपी की तलाश की। हादसे के बाद सूचना देने के ढाई घंटे बाद भी सेक्टर 26 थाने से आईओ माैके पर नहीं आया। सेक्टर 26 थाने के एसएचओ को भी जानकारी दी गई लेकिन किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। जबकि घटनास्थल से मात्र डेढ़ सौ मीटर दूर सेक्टर 26 थाना है।
घटना सेक्टर 7/26 लाइट पाॅइंट की है। पियूष ने बताया कि उसने शाम 4:13 बजे 112 नंबर पर पुलिस कंट्रोल रूम को कॉल की। कॉल के तीन मिनट बाद पीसीआर पहुंच गई। पीसीआर कर्मी यकीन राज और कुलदीप सिंह ने सूचना सेक्टर 26 थाने को दी। लेकिन करीब ढाई घंटे तक कोई जांच अधिकारी नहीं पहुंचा।
पीसीआर कर्मियों ने लगातार 11 बार कंट्रोल रूम को कॉल की लेकिन हर बार टालमटोल वाला जवाब मिला। उन्हें कहा गया कि तेरे बोलने से क्या आ जाएगा आईओ।
गर्मी में खड़े-खड़े परेशान होकर आखिरकार पीड़ित घर लौट गया। शाम 6:44 बजे सेक्टर 26 थाने से हवलदार अनूप सिंह ने पियूष को फोन कर बताया कि वह सेक्टर 28 में सड़क हादसे में व्यस्त हैं इसलिए मौके पर नहीं आ पाए। अनूप सिंह ने बताया कि वह अब वहां से निकल चुका है।
गैंगस्टर होता तो कौन होता जिम्मेदार
पीड़ित का कहना है कि गाड़ी का नंबर देने और संदिग्ध होने की बात कहने के बाद भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की। उसने सवाल उठाया कि अगर गाड़ी में कोई गैंगस्टर होता और वारदात कर देता तो पुलिस इसी तरह हाथ पर हाथ धरे बैठी रहती
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सुबह 4:13 बजे संदिग्ध गाड़ी की सूचना दी गई
4:16 बजे पीसीआर मौके पर पहुंची
11 बार कॉल के बावजूद आईओ नहीं आया
संदिग्ध नंबर की गाड़ी को ट्रेस नहीं किया गया
पीड़ित ने कहा अगर गाड़ी में कोई गैंगस्टर हो तो कौन जिम्मेदार होता।
कोट
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