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निरंजन सिंह रखराः ब्लड ग्रुप बी नेगेटिव, अब तक 38 बार ब्लड डोनेशन

Tue, 24 May 2016 12:40 PM IST
जगदीश जोशी/अमर उजाला, मुक्तसर
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रक्तदाता निरंजन सिंह रखरा - फोटो : अमर उजाला
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ब्लड ग्रुप बी नेगेटिव है। दिन हो या रात, कोई मरीज समाजसेवी निरंजन सिंह रखरा से खून की मांग करता है तो वे कभी इंकार नहीं करते। वे हमेशा रक्तदान के लिए तैयार रहते हैं। रखरा का ब्लड ग्रुप बी नेगेटिव है, इस ग्रुप के किसी भी व्यक्ति को अगर खून की जरूरत है तो रखरा उन्हें निराश नहीं करते। निरंजन सिंह रखरा पेशे से टेलर मास्टर हैं, उनकी गांधी चौक के पास स्थित नेशनल मार्केट में दुकान है।
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कोई जरूरतमंद उनकी दुकान पर रक्त की मांग करने पहुंच जाए तो वह तुरंत सारा काम छोड़ कर मदद को चल पड़ते हैं। कोटकपूरा रोड स्थित दशमेश नगर गली नंबर 1 निवासी समाजसेवी निरंजन सिंह रखरा ने बताया कि वह अब तक कुल 38 बार रक्तदान कर चुके हैं। उन्होंने पहली बार 1982 में खूनदान किया था। अगर उन्हें पता चलता है कि इस ग्रुप के मरीज को खून की जरूरत है तो वह बिना देर किए रक्त दान करने पहुंचते हैं।

यही नहीं उनसे रक्तदान की मांग करने वाले का ब्लड ग्रुप अगर कोई और भी हो तो वह किसी अन्य रक्तदानी से मरीज के लिए खून का प्रबंध करवाते हैं, मगर पास आने वाले जरूरतमंद को खाली नहीं लौटने देते। रखरा का मानना है कि रक्तदान महान दान है। इससे बड़ा कोई दान नहीं है। रखरा समूह युवाओं को भी बढ़-चढ़कर रक्तदान करने की प्रेरणा देते हैं। रखरा का मानना है कि युवा पीढ़ी को रक्तदान करने के लिए आगे आना चाहिए। रक्तदान कर व्यक्ति किसी की जिंदगी बचा सकता है।
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स्वास्थ्य विभाग से मिल चुका है प्रशंसा पत्र
करीब दस साल पहले स्वास्थ्य विभाग की ओर से रक्तदान करने पर एनएस रखरा को प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया जा चुका है। उस समय के सिविल सर्जन डॉ. जीपी सिंह ने रखरा को यह प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया था। यही नहीं डिप्टी कमिश्नर समेत विभिन्न विभागों के अधिकारियों व समाजसेवी संस्थाओं ने भी रखरा को समय-समय पर रक्तदान करने के बदले सम्मान दिए हैं।

समाजसेवा के कार्यों में भी लेते हैं रुचि
निरंजन सिंह रखरा सिर्फ रक्तदान करने के लिए ही नहीं जाने जाते। बल्कि वह अन्य समाजसेवा के कार्यों में भी बढ़-चढ़कर रुचि लेते हैं। वह इस समय लायंस क्लब अनमोल के सीनियर सदस्य भी हैं। वह जहां क्लब के सदस्यों के सहयोग से समय-समय पर जरूरतमंद परिवारों की लड़कियों के विवाह में सामान देकर मदद करते रहते हैं, वहीं अब तक वह विभिन्न जगहों पर कैंप लगवाकर करीब 2,200 मरीजों की आंखों के सफल ऑपरेशन करवा चुके हैं। उन्होंने समाजसेवा के कार्यों की शुरुआत सन 1989 में की थी, जो निरंतर जारी है। वह 1996 में लायंस क्लब आजाद के अध्यक्ष समेत विभिन्न पदों पर आसीन रह चुके हैं।
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