मंडियों में उठान अभी भी धीमी है। शनिवार शाम तक कुल 52.40 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) गेहूं की आवक हो चुकी है, जबकि मात्र 16.44 एलएमटी गेहूं ही उठ पाई है। विभिन्न एजेंसियां 45.43 एलएमटी गेहूं खरीद चुकी हैं। सरकार का दावा है कि 2,65,064 किसानों को 2498 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए हैं।
आवक की रफ्तार तेज, उठान धीमा...अब आगे यह समस्या
सरकार ने मंडियों में गेहूं की खरीद जल्द तो शुरू करवा दी पर खरीद एजेंसियों की तैयारियों पर निगरानी नहीं रखी। इसी लापरवाही के कारण एजेंसियों की तरफ से मंडी लेबर कांट्रेक्टर (एमएलसी) और मंडी ट्रांसपोर्ट कांट्रेक्टर (एमटीसी) की तैयारी के बगैर मंडी में गेहूं की खरीद शुरू कर दी, जोकि तकरीबन एक सप्ताह से ज्यादा उठान में देरी हो गई। अभी 22 से 24 एलएमटी गेहूं की आवक अनुमानित है।
विपक्षी पार्टियों ने आग व बारिश के कारण किसानों को हुए नुकसान के मुआवजे की मांग सरकार से उठाई है। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि प्रदेश में फसलों के खराब होने की सभी घटनाओं का संज्ञान लेकर सरकार किसानों को मुआवजा देकर भरपाई करें। वहीं, इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने कहा कि सरकार ने किसानों को जल्द मुआवजा नहीं दिया तो पार्टी सड़क पर उतरकर लड़ाई लड़ेगी।
हुड्डा ने कहा कि किसान का अनाज कहीं भी सुरक्षित नहीं है। मंडियां गेहूं से अटी पड़ी हैं, जिससे किसान सड़कों पर अपनी फसल रखने को मजबूर हैं। सरकार 25 फीसदी से ज्यादा गेहूं की उठान नहीं करवा सकी है। भाजपा सरकार ने ना बारदाने की व्यवस्था की, ना तिरपाल और ना ही उठान। मौसम के पूर्वानुमान के बावजूद सरकार ने गेहूं को पानी से बचने के लिए उचित प्रबंध नहीं किया।
उधर, इनेलो के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय सिंह चौटाला ने कहा कि धूल भारी आंधी और बारिश से कई जिलों में लाखों टन फसल खराब हो गई है। किसानों के 30 लाख टन से अधिक गेहूं की उठान नहीं हुई है। वहीं, आग की चपेट में आकर करीब 1000 एकड़ से अधिक फसल पूरी तरह से जल गई है। पीएम नरेंद्र मोदी की रैली के लिए किसानों को उनकी फसल का मुआवजा दिया जा सकता है, तो आग व बारिश से हुए नुकसान के लिए भी मुआवजा दिया जाए।