पादरी समेत छह लोगों से 9.66 करोड़ रुपये की हवाला राशि बरामद हुई। मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ कि पादरी एंथनी तीन बड़ी कंपनियां चलाते थे। फादर एथंनी पंजाब व हिमाचल के कैथोलिक स्कूल व अस्पतालों का पूरा लेखा जोखा देखते थे। उन्होंने तीन बड़ी कंपनियां स्थापित कर रखी थीं, जिनके नाम निधि, सहोदया और नवजीवन हैं। तीनों कंपनियां स्कूलों में ईंट से लेकर सेनेटरी पैड, वर्दी और कॉपी किताब सप्लाई करती हैं। तमाम स्कूलों में जितना भी सामान सप्लाई होता है, चाहे वह स्टेशनरी हो या अन्य कुछ और, वह इन्हीं कंपनियों से जाता है। फादर एंथनी के साथ पार्टनर भी हैं।
फादर एंथनी से हाल ही में खन्ना पुलिस ने 9.66 करोड़ की राशि पकड़ी थी, जबकि खन्ना पुलिस पर 6.5 करोड़ की राशि हजम करने का आरोप भी लगा है। डीजीपी दिनकर गुप्ता ने इसकी जांच आईजी क्राइम प्रवीण कुमार सिन्हा को सौंप दी है। वहीं सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिरकार फादर एंथनी के पास 16 करोड़ की नकदी कहां से आई। दरअसल, कैथोलिक चर्च और बिशप हाउस के अधीन काफी स्कूल, कॉलेज व अस्पताल आते हैं। फादर एंथनी खुद नार्थ इंडिया के मशहूर स्कूल सेंट जोसफ के डायरेक्टर हैं। इन स्कूलों में वर्दी के अलावा कॉपी, किताब व उत्तर पुस्तिका का काफी काम होता है।
फादर ने इन स्कूलों में सामान सप्लाई करने के लिए अपनी निजी कंपनियां बना रखी हैं। फादर एंथनी का दावा है कि पैसा सहोदया का था, जिसको बैंक में जमा करवाया जाना था। पता चला है कि जब किसी स्कूल के भवन का निर्माण होना होता था तो भी फादर की कंपनियों से ही ईंट, सीमेंट और अन्य सामान सप्लाई किया जाता था। अगर कोई एजेंट सामान सप्लाई भी करता है तो वह पहले फादर की कंपनी को जाता था, फिर आगे स्कूल व बिशप हाउस को।