लाल जोड़े में सजी दुल्हन हुमा अपने पिता मोहम्मद इरशाद, चाचा, बहन के साथ सुबह करीब 10 बजे जेल में दाखिल हुई। दोपहर करीब एक बजे निकाह की रस्म पूरी हो जाने के बाद मीडिया से बचती हुई गाड़ी में सवार होकर वापस चली गई।
वहीं दूसरी तरफ से निकाह में कैदी वसीम के पिता, भाई, बहन व जीजा सहित अन्य लोग शामिल हुए। दोनों तरफ से कुल आठ लोगों को जेल के अंदर जाने की अनुमति थी। मालेरकोटला से ही निकाह के लिए फकीर मोहम्मद काजी पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि पहली बार जेल में किसी जोड़े का निकाह कराया है।
कत्ल और आर्म्स एक्ट में काट रहा उम्रकैद
निकाह करने वाले कैदी मोहम्मद वसीम थाना सदर अहमदगढ़ में 2010 में दर्ज किए गए कत्ल, आर्म्स एक्ट के केस में उम्रकैद की सजा काट रहा है। इसके अलावा भी उसके खिलाफ मालेरकोटला, धुरी व संगरूर में पर्चे दर्ज हैं। जिससे साफ है कि वसीम ने संगरूर इलाके के बाहर किसी वारदात को अंजाम नहीं दिया।