दिनकर गुप्ता ने इससे पहले जून 2004 से जुलाई 2012 तक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर आठ साल कार्य किया। इस दौरान उन्होंने उस खुफिया ब्यूरो के प्रमुख का संवेदनशील कार्यभार संभाला, जो वीवीआईपी की सुरक्षा की देखभाल करता है। दिनकर गुप्ता को 1992 और 1994 में दो पुलिस वीरता पदकों से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा राष्ट्रपति द्वारा सराहनीय सेवाओं के लिए पुलिस पदक और विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रीय पुलिस पदक (2010) से भी सम्मानित किया जा चुका है। 1999 में दिनकर गुप्ता को लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में ब्रिटिश काउंसिल द्वारा ब्रिटिश शेवनिंग गुरुकुल छात्रवृत्ति से सम्मानित किया गया था।
चन्नी सरकार के समय डीजीपी पद से हटाए गए
पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री बने चरणजीत सिंह चन्नी ने दिनकर गुप्ता को हटाकर 1988 बैच के अधिकारी इकबाल प्रीत सिंह सहोता को डीजीपी का प्रभार सौंपा था। यह तब हुआ जब गुप्ता ने चन्नी के मुख्यमंत्री बनते ही एक महीने की छुट्टी पर जाने का फैसला किया था।
पत्नी के अधीन भी काम किया
पंजाब में डीजीपी पद पर काम करते हुए दिनकर गुप्ता ने अपनी पत्नी विनी महाजन के अधीन भी काम किया। विनी महाजन को कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने राज्य का मुख्य सचिव नियुक्त किया था। यह ऐसा समय भी था जब दोनों पति-पत्नी के कंधों पर पंजाब के सबसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारियां रहीं। इस तरह दिनकर गुप्ता को अपनी पत्नी मुख्य सचिव विनी महाजन के अधीन काम करना पड़ा। उल्लेखनीय है कि विनी महाजन भी दिनकर गुप्ता की भांति 1987 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। उन्हें मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने मुख्य सचिव के पद से हटा दिया था।