राष्ट्रीय जांच एजेंसी (फाइल फोटो)
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आतंकी संगठन देश की शांति को भंग करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। फेसबुक, ट्विटर व्हाट्सएप, यूट्यूब और कई वेबसाइटों पर सोशल मीडिया एकाउंट चलाकर इस दिशा में एक निरंतर मुहिम चलाई जा रही है। यह बात शुक्रवार को उस समय सामने आई जब राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने मोहाली स्थित विशेष अदालत में आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू समेत 10 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। यह लोग सिख फॉर जस्टिस व रेफरेंडम-2020 का ऑनलाइन प्रचार कर राज्य के युवाओं को गुमराह कर भड़का रहे थे।
इस मामले के अन्य आरोपियों में परगट सिंह, सुखराज सिंह उर्फ राजू, बिक्रमजीत सिंह उर्फ विक्की, मंजीत सिंह उर्फ मंगा, जतिंदर सिंह उर्फ गोल्डी, गुरविंदर सिंह उर्फ गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी, हरप्रीत सिंह उर्फ हैप्पी, कुलदीप सिंह उर्फ कीपांड व हरमीत सिंह उर्फ राजू शामिल हैं। इन सभी पर धारा 120बी, 124ए व यूए (पी) एक्ट 1967 की धारा 13, 16, 17, 18 व 20 के तहत दर्ज मामले में चार्जशीट दाखिल की गई है।
जानकारी के मुताबिक यह मामला साल 2017-18 है। यह केस पंजाब में अशांति फैलाने की साजिश सहित हिंसा की घटनाओं के साथ जुड़ा हुआ है। एसएफजे व रेफरेंडम-2020 का ऑनलाइन प्रचार कर युवाओं को भड़काया गया। ये हिंसक घटनाएं विदेश में बैठे एसएफजे के हैंडलरों के निर्देश पर करवाई गई थीं।
अप्रैल 2020 में एनआईए ने शुरू की थी जांच
2018 में अमृतसर के सुल्तानविंड पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज हुआ था। बाद में अप्रैल 2020 में एनआईए ने इस मामले की जांच शुरू की थी। जांच में यह बात सामने आई थी कि एसएफजे आतंकी संगठन है। इस संगठन के लोगों ने भारत में देशद्रोह फैलाने व शांति को भंग करने के लिए अनेक सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल किया।
सोशल मीडिया के माध्यम से पंजाब के युवाओं को क्षेत्र व धर्म के नाम पर भड़काकर आतंक की राह पर चलने के लिए उकसाया गया। जांच में यह बात भी स्पष्ट हुई थी कि एसएफजे के गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कई युवाओं को कट्टरपंथी बनाया और उन्हें एसएफजे में भर्ती किया। उसने गैर कानूनी एसोसिएशन भी तैयार किए थे। आरोपियों ने साजिश को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न एमटीएसएस प्लेटफार्मों के जरिए विदेश में उनके हैंडलरों को फंड भी मुहैया करवाया था।