पंजाब की नदियों में इंडस्ट्रियल वेस्ट मिलाने से हो रहे प्रदूषण का सच अब सामने आएगा। एनजीटी ने सैंपल लाने के निर्देश जारी किए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने केंद्रीय और राज्य के प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को संयुक्त टीम बना कर सतलुज व ब्यास नदियों और लुधियाना के बुड्ढा नाला से पानी के सैंपल लेने के निर्देश दिए हैं। बटाला के कीड़ी अफगाना की चड्ढा शुगर मिल द्वारा ब्यास में शीरा फेंकने से कई जलीय जीवों के मारे जाने के बाद हाहाकार मच गया था। इसके बाद एनजीटी ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए वीरवार को सभी संबंधित पक्षों को तलब किया था।
सुनवाई के दौरान केंद्र और पंजाब के प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को सतलुज, ब्यास व बुड्ढा नाला के पानी के तीन-तीन सैंपलों की जांच के निर्देश दिए। साथ ही छह हफ्ते में ट्रिब्यूनल को रिपोर्ट सौंपने को भी कहा गया है। इसके अलावा केंद्र, पंजाब व राजस्थान सरकारों, सेंट्रल और पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, लुधियाना व जालंधर के नगर निगम, चड्ढा शुगर मिल, राणा शुगर मिल समेत 11 लोगों को नोटिस दिया है। केस की अगली सुनवाई 17 जुलाई को होगी।
ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही सरकार : खैरा
एनजीटी में याचिका दायर करने वाले पंजाब के नेता प्रतिपक्ष सुखपाल खैरा ने ट्रिब्यूनल के आदेश पर संतुष्टि जताई। साथ ही कहा कि पंजाब सरकार के वकीलों ने सुनवाई के दौरान उन पर मामले के सियासीकरण का आरोप लगाया, जिससे उन्हें काफी दुख पहुंचा है।
सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को नदियों को दूषित करने, हजारों मछलियां व अन्य जीव मरने के गंभीर मामले में उचित कार्रवाई करनी चाहिए थी। लेकिन वह सियासत के आरोप लगा कर ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ट्रिब्यूनल ने पंजाब सरकार के दावों को दरकिनार कर समयबद्ध जांच के आदेश दिए। खैरा ने कहा कि वह पंजाब की नदियों में जहर मिला कर वातावरण की तबाही के मामले को अंजाम तक ले जाएंगे।