रिफाइनरी प्रदूषित पानी को ग्रामीण क्षेत्र की ग्रीन बेल्ट में छोड़ती है, जिससे सैकड़ों पेड़-पौधे सूख गए। कई बार की शिकायत के बाद भी जब स्थानीय प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की तो उन्होंने 2018 में बोहली व ददलाना गांव के सरपंचों के साथ मिलकर एनजीटी में शिकायत की।
15 नवंबर 2018 को एनजीटी के निर्देश पर डीसी, सीपीसीबी, एसएसपीसीबी की टीम ने गांव सुताना, बोहली व ददलाना का दौरा किया। 15 जनवरी 2019 को टीम ने एनजीटी में अपनी रिपोर्ट जमा कराई, जिसमें खामियां पाई गईं।
एक मार्च 2019 को एनजीटी ने रिपोर्ट पर संज्ञान लिया और एचएसपीसीबी को आदेश दिए कि पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन करें और रिपोर्ट सौंपें। 9 मई 2019 को एचएसपीसीबी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसे सीपीसीबी और एचएसपीसीबी ने तैयार किया था।
ऐसे किया गया नुकसान का आकलन
आकलन समिति की रिपोर्ट के अनुसार रिफाइनरी के प्लांट द्वारा थिराना ड्रेन में छोड़े जा रहे प्रदूषित पानी से 83.33 लाख का नुकसान और बिना ट्रीट हुआ पानी छोड़ने से पानी के संकलन केंद्र में 4.87 लाख का नुकसान पाया गया। वातावरण को दोबारा सही करने के लिए 9.96 करोड़ की लागत आने का टीम ने आकलन किया। प्रदूषित पानी को ड्रेन में छोड़ने से 7 करोड़ 34 लाख के नुकसान आकलन किया गया।