चंडीगढ़। सेक्टर-16 के पंजाब कला भवन में रूबरू कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें दूर- दूर से साहित्यकार शामिल हुए। साहित्यकार रामकुमार तिवारी ने कहा कि आज के दौर में हमारी प्राथमिकता में साहित्य नहीं रहा है। यदि हमारे जीवन में साहित्य प्राथमिकता में आ जाए तो उसी दिन से समाज समरसता और संवादी हो जाएगा। संवाद का होना बहुत ही जरूरी है। इससे हमारे रिश्ते सुधरते हैं। अखबार की खबरें बासी हो जाती है लेकिन साहित्य बासी नहीं होता। साहित्य नहीं रहेगा तो हम भीड़ बन कर रह जाएंगे। साहित्य, कला और संगीत हमारी आत्मा की प्यास बुझाता है। हमें साहित्य के साथ जीना है।
मनुष्य की मूल अभिव्यक्ति कविता ही है। कविता लय से उपजी थी। मनुष्य और कविता दोनों का संक्रमण काल है। इसे खत्म होना आसान नहीं है। भारत की परंपरा साधना की रही है। कविता हमेशा हमें अनन्य की ओर ले जाती है।
कविता संकेत देती है कि आपको पूरा मनुष्य होना है अधूरा नहीं
तिवारी ने कहा कि जीवन के छंद से विमुख होना दुखांत है। जब नल आया तो कुआं का ठंडा और मीठा पानी नहीं रहा। उसके गीत नहीं लिख सकते हैं। पनीहारी के गीत भी नहीं है। काल गति के साथ जीवन बदलता है। लेकिन मनुष्य का होना नहीं बदल सकेगा। कविता संकेत देती है कि आपको पूरा मनुष्य होना है। अधूरा मनुष्य नहीं। कहानियों में घटनाएं होती हैं। उन घटनाओं को रचना बनाने के लिए संदर्भ आयाम, कल्पना, स्वप्न और आदर्श मूल्य जोड़ने पर कहानी बनती है।