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IAS अशोक खेमका नई मुसीबत में फंसे, जानिए अब क्या विवाद हुआ?

Wed, 25 Oct 2017 10:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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आईएएस अशोक खेमका
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अकसर सुर्खियों में रहने वाले हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अशोक खेमका अब एक और नई मुसीबत में फंस गए हैं और विवाद की वजह भी खास है। मामला हरियाणा भंडारण निगम में गेलवेल्यूम शीट खरीद को लेकर है। नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला और कांग्रेस विधायक रघुबीर सिंह कादियान ने शीट खरीद में खेमका को बचाने का आरोप लगाया है। उन्होंने मंगलवार को खेमका का नाम लिए बिना भंडारण निगम की खरीद में हुई वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा उठाया।
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कादियान कड़े तेवरों में थे और सरकार पर शीट खरीद में वित्तीय चपत लगने के आरोपियों को बचाने को लेकर खूब बरसे। कादियान ने कहा कि सरकार निगम मामले में लीपापोती कर रही है। खरीद मामला विधानसभा की समिति के पास भी आया है। उस समिति के वह भी सदस्य हैं। आईएएस इतने पावरफुल हैं कि समिति के समक्ष पेश ही नहीं हो रहे। लगता है कि सरकार का भी उन्हें पूरा संरक्षण प्राप्त है। उन्होंने स्पीकर कंवर पाल केजरिए सरकार के समक्ष मांग रखी है कि उस आईएएस को समिति के समक्ष पेश करें, जिसके समय खरीद हुई है। 30 अक्टूबर को विधानसभा समिति की बैठक होनी है। उसमें खरीद मामला फिर आएगा।

याद रहे कि कैग की साल 2013-14 की रिपोर्ट में हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोरेशन में गेलवेल्यूम शीट की खरीद में अनियमितता का खुलासा हुआ था। इस खुलासे को आधार बनाकर आबकारी एवं कराधान विभाग के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव रोशन लाल ने प्रदेश के मुख्य सचिव डीएस ढेसी को पत्र लिखा था। उन्होंने खेमका की ओर से की गई शीट की खरीद की सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी। गेल वेल्यूम शीट की खरीद के समय अशोक खेमका वेयर हाउसिंग कारपोरेशन के प्रबंध निदेशक थे।
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खेमका को लेकर एक और मामला सुर्खियों में आया

अशोक खेमका
खेमका को लेकर एक और मामला सुर्खियों में आया गया है, हालांकि खेमका कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं। लेकिन डॉ. आदित्य को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में सलाहकार की नियुक्ति पर पेंच फंस गया है। आरोप है कि उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर से अनुमोदित सिफारिशों को भी लागू नहीं किया। मामला हाल का ही है। हाईकोर्ट ने ड्रग डी एडिक्शन नियमों में संशोधन करने के लिए कमेटी का गठन किया था। यह कमेटी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के तत्कालीन एसीएस आरआर जोवल की अध्यक्षता में बनी थी।

समिति ने कई नियमों में संशोधन किया, जिसे सीएम ने बीते 17 जुलाई को मंजूरी दे दी। इसके बाद जोवल की जगह खेमका विभाग के प्रधान सचिव बन गए। उन्होंने सीएम से अनुमोदित सिफारिशें लागू करने के बजाए डॉ. आदित्य को नए सिरे से संशोधन की सिफारिशें तय करने के लिए सलाहकार नियुक्त कर दिया। इसके लिए उन्होंने किसी से मंजूरी नहीं ली। ये मामला जैसे ही राज्य मंत्री कृष्ण बेदी के संज्ञान में आया, उन्होंने खेमक ा को डॉ. आदित्य को हटाने के आदेश दिए। इसके बाद खेमका ने अब डॉ. आदित्य को हटा दिया है।

खेमका की मंत्री केसाथ तल्खी तय
इस पूरे मामले में आईएएस अशोक खेमका के साथ विभाग के मंत्री की तल्खी तय है। खेमका ने 23 अक्तूबर को सरकार को लिखे पत्र में कहा है कि न तो मैं इस मामले में कानून विद की राय से सहमत हूं और न ही मंत्री के आदेशों से। डॉ. आदित्य के संदर्भ में जारी किए गए आदेश बिना किसी पारिश्रमिक के किए गए हैं, जो कि पूरी तरह से सही और कानूनी हैं। यह आदेश जनहित को देखते हुए जारी किए गए हैं, जिससे नशेड़ियों का पुनर्वास हो सके और कदाचार पर लगाम लगे, लेकिन सिविल सेवाओं के उच्च मूल्यों का निर्वहन करते हुए 13 सितंबर 2017 को डॉ. आदित्य को ड्रग डी एडिग्शन सेंटर में बिना पारिश्रमिक नियुक्त करने के आदेश वापस लेता हूं।
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