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सेना की नई 'शक्ति', आसानी से होगी दुश्मन और अपने एयरक्राफ्ट की पहचान

Sun, 07 Aug 2016 11:16 AM IST
मोहित धुपड़/अमर उजाला, अंबाला कैंटोनमेंट
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भारतीय सेना का हिस्सा बना थ्री डी टेक्निकल कंट्रोल राडार - फोटो : फाइल फोटो
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युद्ध और चौकसी दौरान एरियल (आसमानी) टारगेट को पहचानने में अब सेना को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी। इस दौरान उनकी मशक्कत भी कम होगी और फटाफट से सेना अपने एरियल टारगेट को पहचानकर उसकी सूचना अपने एंटी क्राफ्ट टैंक, मिसाइल और गन प्वाइंट को देगी। इसके बाद उस टारगेट को हवा में ही नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा।
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अब आसमान में अपने और दुश्मन के लड़ाकू जहाजों को पहचानने में देश को ‘अपना’ रडार चूक नहीं करेगा। ये काम पहला इंडिया मेड थ्री डाइमेंशन टेक्निकल कंट्रोल राडार खास तकनीक के जरिये आसानी से करेगा।

इस सिस्टम को इंडिया में ही तैयार किया गया है और एयरफोर्स में ‘रोहिणी’ व नैवी में ‘रेवती’ के नाम से शामिल करने के बाद अब  इसी रडार को और ज्यादा एडवांस तकनीक से लैस कर अभी हाल ही में इंडियन आर्मी ने भी अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। इससे इंडियन आर्मी की ताकत और ज्यादा बढ़ गई है।
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इस तरह काम करेगा थ्री डी रडार

चीन सैनिक - फोटो : reuters
इस रडार सिस्टम की रेंज भी अपेक्षाकृत उन राडार सिस्टम से काफी अच्छी है, जो अभी आर्मी में इस्तेमाल किए जा रहे हैं। अभी तक इस्तेमाल किए जा रहे ये राडार हॉलैंड निर्मित हैं और उनकी रेंज 5 से 10 किलोमीटर तक है। जबकि इस थ्री डी राडार सिस्टम की रेंज 90 से 120 किलोमीटर की परिधि में हैं।

इसके साथ 125 केवी के दो बड़े जनरेटर सेट साथ होते हैं। इस वजह से ये सिस्टम 24 घंटे ऑपरेट हो सकता है। इस सिस्टम से 20 किलोमीटर की परिधि में 10 टीडीआर (टारगेट डॉटा रिसीवर) सेट किए जा सकते हैं।

ये टीडीआर विभिन्न दिशाओं में होंगे जो एंटी क्राफ्ट टैंक, मिसाइल और गन प्वाइंट से जुड़े होंगे। इस सिस्टम से जैसे ही स्टीक डॉटा एरियल सर्च के बाद टीडीआर तक पहुंचेगा, तभी एंटी क्राफ्ट टैंक, मिसाइल और गन प्वाइंट आसमान में ही संबंधित टारगेट को नेस्तनाबूद कर देंगी।
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यूं होगी अपने और दुश्मन के जहाज की पहचान

कश्मीर में सुरक्षा समीक्षा के ल‌िए पहुंचे सेना प्रमुख - फोटो : ANI
इस रडार सिस्टम की खास बात यह है कि इसमें एडवांस आईएफएफ (आइडेंटिफाई फ्रेंड एंड फॉ सिस्टम) तकनीक का इस्तेमाल भी किया गया है। इसी सिस्टम से ये रडार आसमान में अपने और दुश्मन के जहाज में फर्क करेगा और उसका डॉटा टीडीआर को देगा।

दरअसल, इस सिस्टम में कोडिंग और डिकोडिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। ये तकनीक इंडियन एयरकाफ्ट में भी रहेगी। जैसे ही ये राडार कुछ कोड एरियल करेगा, तो ऐसे में यदि उसका रिप्लाई राडार सिस्टम से मेल खाता हुआ आता है तो ये समझ लिया जाएगा कि आसमान में उड़ रहा एयरक्राफ्ट इंडिया का है।

यदि एरियल कोड का रिप्लाई अपेक्षानुसार नहीं मिलता तो इससे मालूम चल जाएगा कि संबंधित  जहाज दुश्मन का है। इसी आईएफएफ सिस्टम की कोडिंग-डिकोडिंग तकनीक राडार अपने और दुश्मन के जहाज में फर्क आसानी से कर लेगा। जबकि इससे पहले इस काम के लिए सेना को बहुत को अपने एक्शन के दौरान खासी मशक्कत करनी पड़ती थी।

 
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