पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश पर चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से इस साल बनाई गई ‘कंट्रोलिंग ऑफ प्लेसिस ऑफ पब्लिक एम्यूजमेंट पालिसी’ के बाद कितने नए लाइसेंस दिए गए, इसकी जानकारी अदालत को अभी नहीं दी जा सकी है। यूटी प्रशासन ने इस संबंध में जानकारी देने के लिए और समय मांगा है। हाईकोर्ट ने सुनवाई स्थगित कर दी है।
हाईकोर्ट को बताया गया है कि नई नीति नोटिफाई कर एक अप्रैल से लागू कर दी गई है। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर पूछा था कि यह भी बताया जाए कि नई नीति के तहत कितने डिस्कोथेक और बार ने लाइसेंस के लिए आवेदन किया है और कितनों को लाइसेंस जारी किया गया। यह जानकारी देने के लिए यूटी प्रशासन ने हाईकोर्ट से कुछ और समय मांगा, जिस पर जस्टिस राजन गुप्ता की बेंच ने प्रशासन को समय देते हुए सुनवाई छह मई तक स्थगित कर दी है।
पिछली सुनवाई पर बेंच को बताया था की नीति के तहत महज एक डिस्कोथेक ने ही लाइसेंस को आवेदन किया है, जबकि शहर में 10 डिस्कोथेक और 73 बार व पब हैं। प्रशासन ने बताया था कि केवल एक आवेदन ही आने की वजह से लाइसेंस के लिए आवेदन की तिथि बढ़ाई गई है।
हालांकि, प्रशासन ने साफ कर दिया था कि भले ही आवेदन की तिथि बढ़ा दी गई है, लेकिन नई नीति के तहत डिस्कोथेक, पूल व रिएल्टी गेम्स, मशीन पार्लर्स आदि को रात के 12 बजे के बाद चलने की इजाजत नहीं दी जाएगी और न ही 24 साल से कम उम्र के किसी युवक को शराब परोसी जाएगी। उल्लेखनीय है कि पिछले साल जून महीने में एक डिस्कोथेक के बाहर गोली चलने के कारण सिटी ब्यूटीफुल की नाइट लाइफ की सुरक्षा सुनिश्चित बनाने के लिए हाईकोर्ट ने नीति बनाने का निर्देश दिया था।