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नया आविष्कार: क्लोन के सीमन से पैदा कर दी कटड़ी

Fri, 19 Jun 2015 12:15 PM IST
ब्यूरो /अमर उजाला, करनाल।
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नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनडीआरआई) करनाल के वैज्ञानिकों ने संस्थान में क्लोन तकनीक से पैदा हुए झोटे (भैंसा) श्रेष्ठ के सीमन से कटड़ी पैदा करने में सफलता पायी है।
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संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार दुनिया भर में किसी क्लोन झोटे के सीमन से कटड़ी पैदा होने का यह पहला मामला है। खास बात यह है कि डिलीवरी सामान्य तरीके से हुई और कटड़ी पूरी तरह से स्वस्थ है। यह कटड़ी हालांकि इसी वर्ष 29 मार्च को पैदा हुई थी लेकिन वैज्ञानिक उसके जीवित रहने को सशंकित थे इसलिए इतने महीनों तक वैज्ञानिकों ने इसे गोपनीय रखा और लगातार उसकी निगरानी करते रहे।

डेयरी सेक्टर में देश के सबसे बड़े संस्थान एनडीआरआई के निदेशक डॉ. एके श्रीवास्तव ने बताया कि हालांकि क्लोन के सीमन से पशुओं को गर्भधारण कराने के प्रयास पहले भी किए जाते रहे हैं लेकिन हर बार क्लोन किसी न किसी बीमारी की चपेट में आ जाते थे।
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ऐसे में उनका सीमन विकसित नहीं हो पाता था और गर्भधारण कराने में विफल रहता था। वैज्ञानिकों ने निरंतर निगरानी रखकर इस क्लोन झोटे को स्वस्थ रखने में कामयाबी पायी और अंतत: उसके सीमन से अगस्त 2014 में भैंस ने गर्भधारण किया, जिससे मार्च में कटड़ी पैदा हुई।

डॉ. श्रीवास्तव ने इसे संस्थान के वैज्ञानिकों की बड़ी कामयाबी बताते हुए कहा कि इसने साबित कर दिया है कि क्लोन भी प्रजनन प्रक्रिया में कामयाब भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि नवजात पूरी तरह स्वस्थ है और उसे वैज्ञानिकों की टीम की कड़ी निगरानी में रखा गया है। श्रेष्ठ झोटे के सीमन से चार और भैंसों ने गर्भधारण किया है। नए शोध ने देश में पशुओं की नस्ल सुधार और संवर्धन में संभावनाओं के नए द्वार भी खोल दिए हैं।

क्लोन भैंस गरिमा-2 दे चुकी है महिमा को जन्म
इससे पहले एनडीआरआई मादा क्लोन से बछड़ियों को जन्म दिलाने में सफल रहा है। यहां के वैज्ञानिकों की मदद से क्लोन भैंस गरिमा-2 ने 25 जनवरी 2013 को महिमा और 27 दिसंबर 2014 को करिश्मा नामक बछड़ियों को जन्म दिया था। इसके बाद से ही संस्थान में क्लोन तकनीक पर शोध जारी है।
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