बैंकिंग सेक्टर में करियर की राह तलाश रहे युवाओं की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। अब तक बैंक क्लरिकल से लेकर पीओ तक लिए सिर्फ एक लिखित परीक्षा होती थी, लेकिन अब आवेदकों को ऐसी दो परीक्षाओं से गुजरना होगा।
गवर्नमेंट सेक्टर के 17 बैंकों में विभिन्न पदों पर भर्ती के लिए कॉमन एग्जाम आयोजित कराने वाले इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सेलेक्शन (आईबीपीएस) ने यह फैसला लिया है। शनिवार को ही आईबीपीएस का वर्ष 2015 के लिए नया कैलेंडर जारी किया गया। इसमें परीक्षाओं की संभावित तिथि भी घोषित कर दी गई है।
अब प्री और मेन एग्जाम
एसएससी की तर्ज पर अब युवाओं को पहले प्री एग्जाम देना होगा और इसमें पास होने के बाद ही मेन एग्जाम में हिस्सा ले सकेंगे। प्री एग्जाम के नंबर मेन में काउंट नहीं होंगे। वह सिर्फ मेन तक जाने का स्टेप होगा।
मेन पास आउट प्रतिभागियों को मेरिट लिस्ट के आधार पर शॉर्टलिस्ट कर इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। यानी अब बैंकिंग सेक्टर में नौकरी पाना पहले से कहीं ज्यादा पेचीदा हो गया है।
परीक्षा की संभावित तिथियां
पीओ/मैनेजमेंट ट्रेनी के लिए कॉमन प्री एग्जाम 3, 4, 10 व 11 अक्तूबर 2015 को होना संभावित है। इसकेअलावा रीजनल रूरल बैंक के लिए प्री एग्जाम सितंबर और क्लर्क के लिए दिसंबर 2015 में होगा।
कैंडिडेट्स रिव्यू
कंपटीशन एग्जाम की तैयारी कर रही सेक्टर-9 निवासी सोनिया ने बताया कि अब बैंकिंग सेक्टर में करियर और भी टफ हो जाएगा। बैंकिंग में पहले ही एग्जाम काफी लैंदी रहता है। अब प्री होने से प्रक्रिया और लंबी हो जाएगी। इससे रिजल्ट प्रतिशत पर भी फर्क पड़ेगा। सेक्टर-17 निवासी हर्ष ने बताया कि वह दो साल से बैंक पीओ की तैयारी कर रहा है। पिछले एग्जाम में मेरिट के बिल्कुल करीब था, लेकिन अब अचानक प्री भी जोड़ दिया गया है। इस साल प्री से गुजरने के बाद ही पैटर्न समझ आएगा।
आईबीपीएस की प्रक्रिया
बैंक अपनी मैन पॉवर रिक्वायरमेंट आईबीपीएस को बताते हैं। आईबीपीएस उसकेअनुसार कॉमन एग्जाम कंडक्ट करता है। कोई भी ग्रेजुएट स्टूडेंट आवेदन कर सकता है। अब इसमें मेरिट का भी कोई झंझट नहीं है।
स्टूडेंट अपना बैंक प्रेफरेंस फॉर्म में अंकित करते हैं। इंटरव्यू केबाद स्टूडेंट की च्वाइस व बैंक की रिक्वायरमेंट को ध्यान में रखकर भर्ती होती है। अगली परीक्षा तक स्टूडेंट कीपिछली कटऑफ मान्य रहती है। उसकेबाद फिर से आवेदन करना होता है।
कोट्स...
आईबीपीएस का पैटर्न चेंज हो गया है। पहले के पैटर्न में कटऑफ के अंदर कम मेरिट वाले आवेदक भी आ जाते थे। जैसे 200 नंबर के एग्जाम में 81 कटऑफ तय की गई तो उसमें कैंडिडेट की संख्या काफी बढ़ जाती थी। इससे इंटरव्यू लेने वाले एक्स बैंक ऑफिसर्स तक की मदद लेनी पड़ती थी। अब प्री एग्जाम में स्क्रीनिंग हो जाएगी। इसके बाद मेन एग्जाम होने से नंबर ऑफ कैंडिडेट्स की संख्या घटेगी। हो सकता है अब एसएससी जैसी प्रक्रिया ही अपनाई जाने लगे।
- आरके महाजन, हेड, ब्राइट एकेडमी, सेक्टर-15