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पीजी संचालकों के लिए प्रशासन का नया फरमान

Sun, 15 Mar 2015 06:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
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वर्षों बाद गमाडा ने अपनी पीजी पॉलिसी में बदलाव कर दिया है। अब शहर में साढ़े सात मरले से छोटे घरों में पीजी नहीं खुल पाएंगे। पीजी मालिक को ही पीजी के वाहनों की पार्किंग का इंतजाम करना होगा। यह संशोधन गमाडा ने चंडीगढ़ की तर्ज पर किए हैं। पॉलिसी की एक कॉपी डीसी, एसएसपी और निगम क मिश्नर को भी भेज दी है।
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जानकारी के मुताबिक गमाडा ने हाईकोर्ट में मामला पहुंचने के बाद पीजी पॉलिसी में संशोधन किया। संशोधन करने से पहले गमाडा द्वारा इलाके की रेजिडेंशियल एसोसिएशनों और पीजी ओनर वेलफेयर एसोसिएशन के सुझावों को सुना। इसके बाद नई पीजी पॉलिसी को तैयार किया गया है। गमाडा ने अपनी पॉलिसी में साफ किया है कि पीजी मालिक या उसके फैमिली मेंबर को भी उक्त घर में रहना होगा।

पीजी हाउस बढ़िया तरीके से साफ सफाई रखने की जिम्मेदारी मकान मालिक की होगी। गमाडा ने साफ किया है कि पीजी हाउस में 150 वर्ग गज कम से कम जगह होनी चाहिए। साथ ही पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट की गाइड लाइन के मुताबिक बाथरूम का इंतजाम करना होगा। पांच लोगों के लिए एक बाथरूम रहेगा।
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गमाडा ने पीजी पॉलिसी में साफ किया है कि उन्हीं लोगों को पीजी खोलने की अनुमति दी जाएगी। जो कि गमाडा द्वारा निर्धारित नियमों को पूरा करते हैं। किसी भी प्रकार गैर कानूनी तरीके से निर्माण करने वाले को पीजी खोलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। वहीं, पीजी के चलते पड़ोसी परेशान नहीं होने चाहिए। इलाके में माहौल खुशनुमा रहे। इसकी सारी जिम्मेदारी पीजी मालिक की ही रहेगी।

पीजी की जानकारी तीन दिन में पुलिस को देनी होगी
पीजी मालिक को अपने यहां रहने वाली पीजी का ब्योरा और उनसे लिए जाने वाले चार्जेस पीजी हाउस में प्रदर्शित करने होंगे। साथ ही पीजी संबंधी जानकारी इलाके के थाने के एसएचओ को तीन दिन में मुहैया दिन में देनी होगी।
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पीजी में रहने वालों के लिए हैं यह शर्तें

पीजी खोलने के लिए मकान मालिक को गमाडा के पास रजिस्ट्रर होना पड़ेगा। इसके लिए उसे दस हजार रुपये का डिमांड ड्रॉफ्ट बनाकर गमाडा को भेजना होगा। इसके बाद गमाडा द्वारा तीन साल के लिए उसे परमिशन दी जाएगी। तीन साल के बाद यह परमिशन रिन्यू होगी।

इसके अलावा पीजी मालिक को उस इलाके की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होगा। अगर कहीं रेजिडेंट वेलफेयर संस्था नहीं है, तो पड़ोसियों से अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा पीजी हाउस में किसी तरह का कोई फ्रंट आफिस नहीं बनेगा। पीजी हाउस पूरी तरह घर की तरह रहेगा। नियम टूटने पर गमाडा द्वारा कार्रवाई की जाएगी।

पीजी में रहने वाले लोगों से अच्छे व्यवहार व आचरण के लिए उसके पैरेंटस या गार्डियन जिम्मेदार होंगे। पीजी में रहने वाला व्यक्ति किसी भी तरह की गलत कामों में लिप्त नहीं होना चाहिए। जिससे समाज में गलत स्थितियां पैदा हो। इसके अलावा पीजी में अलग से रसोई नहीं बनाएंगे।

यह तय की है पीजी की परिभाषा
गमाडा ने पीजी की परिभाषा भी तैयार की है। इसके तहत कोई भी किसी कोर्स का विद्यार्थी, सरकारी या प्राइवेट मुलाजिम, प्रोफेशनल। जो कि मकान मालिक के साथ घर पर रहता है। मकान मालिक द्वारा ही उसे खाना दिया जाता है या नहीं, लेकिन इसका हर महीने भुगतान करता है।

पीजी का यह मतलब कभी नहीं है कि एक मकान को खरीदकर आगे किराए पर दे दिया। यह होटल या धर्मशाला की तरह बिल्कु ल नहीं होगा। पीजी मालिक उसे कभी भी बिना नोटिस से खाली करने के लिए कह सकता है।
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