पीजीआई में भाई-भतीजावाद भ्रष्टाचार की जड़ें मजबूत करने में लगा है। पीजीआई में चहेतों को फिट करने के लिए अनरिजर्व कैटेगिरी में नियुक्त 21 लैब टेक्नीशियन को रिजर्व कैटेगिरी में डाल दिया।
इससे अनरिजर्व की पोस्टें खाली हो गईं और उनमें अपनों को लगा दिया गया। सरकारी दस्तावेज रिजर्वेशन रोस्टर में कांटछांट कर गुपचुप तरीके से इस काम को अंजाम दिया गया।
इन 21 लोगों को एससी कोटे में दिखाकर इनके प्रमोशन 10-15 साल तक रोके हुए हैं। दूसरा यह है कि एससी कैटेगिरी में 21 लोगों के आने से ये पोस्टें फुल हो र्गईं। इससे एससी कैटेगिरी के इतने लोग भर्ती ही नहीं हो पाए।
ऐसे हुआ खुलासा
जब लैब टेक्नीशियनों का पिछले 15 साल से प्रमोशन नहीं हुआ था तो उन्होंने इसका कारण जानने के लिए खोजबीन शुरू की। जांच में पता चला कि रिजर्वेशन रोस्टर में गड़बड़ी हुई है। जब रिकार्ड हासिल किया तो सबकी आंखें फटी रह गईं। रोस्टर में अनरिजर्व कैटेगिरी में नियुक्त टेक्नीशियन के नाम काटकर रिजर्व कैटेगिरी में डाला हुआ था। कई केस तो ऐसे थे कि एक टेक्नीशियन को पहले अनरिजर्व कैटेगिरी में, फिर रिजर्व कैटेगिरी में और फिर से अनरिजर्व कैटेगिरी में डाल रखा था।