नेपाल में जलप्रलय के बाद नारायणी नदी के बहाव के साथ सिर्फ मलबा, घरेलू सामान ही नहीं बल्कि शव भी बहकर आने लगे हैं। महराजगंज व कुशीनगर में नदी किनारे बृहस्पतिवार को सात शव मिलने के बाद सन्नाटा पसरा है। शव देखकर लोगों के मन में शोक भी है और दहशत भी है। तट के किनारे बसे गांवों में सन्नाटा है। दहशत है।
नेपाल में आई जलप्रलय की भयावहता का असर बृहस्पतिवार को नदी में भी दिखाई दिया। बृहस्पतिवार दोपहर एसएसबी और एसडीआरएफ की टीम ने टेलफाल क्षेत्र में भेड़िहारी के निकट ठोकर नंबर एक के पास से तीन शव बरामद किए। इनमें दो महिलाओं और एक पुरुष का शव शामिल था। इसके अलावा समीप के टेलफाल क्षेत्र से एक महिला का शव भी पानी से बाहर निकाला गया। इस तरह कुल चार शव बरामद किए गए। शवों की पहचान नहीं हो सकी है। सीओ निचलौल रविन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि बरामद शवों को भेड़िहारी में ठोकर नंबर एक के पास सुरक्षित रखा गया। इसकी सूचना नेपाल प्रशासन को दे दी गई है। नेपाल प्रशासन की ओर से शवों को ले जाने की बात कही गई है। मृतकों की पहचान नहीं हो सकी है।
नदी में बहकर आ रही तबाही की तस्वीर
गंडक नदी का पानी सिर्फ नेपाल की तबाही की कहानी नहीं सुना रहा, बल्कि अपने साथ बहाकर लाए सामानों के जरिए वहां के लोगों पर टूटे कहर की तस्वीर भी दिखा रहा है। बृहस्पतिवार की सुबह खड्डा क्षेत्र के छितौनी तटबंध के भैसहा, मदनपुर, हनुमानगंज, लक्ष्मीपुर पड़रहवां, माघी भगवानपुर के पास नदी किनारे पहुंचे ग्रामीणों को पानी के साथ बहकर आई लकड़ियों के बीच गैस सिलिंडर, टायर, मोबिल का ड्रम, अलमारी और घर-गृहस्थी का अन्य सामान मिला। ग्रामीणों ने इन्हें बाहर निकाला। नदी किनारे बिखरा यह सामान देखकर सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि नेपाल में आए जलप्रलय ने लोगों को संभलने तक का मौका नहीं दिया होगा। जिन घरों में कुछ समय पहले तक चूल्हा जल रहा होगा, बच्चों की किलकारियां गूंज रही होंगी और परिवार के लोग रोजमर्रा की जिंदगी में व्यस्त होंगे, उन्हीं घरों का सामान अब सैकड़ों किलोमीटर दूर गंडक के किनारे पहुंच गया है। नदी के साथ बहकर आई लकड़ियां भी जगह-जगह जमा हैं। उसे ग्रामीण जलावन के लिए बाहर निकाल रहे हैं।
गोसाईं कुंड पहुंचे सैकड़ों पर्यटकों का टूटा संपर्क, 450 का पता नहीं
भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई भीषण बाढ़ ने रसुवा समेत आसपास के इलाकों में भारी तबाही मचा दी। गोसाईं कुंड और कैलाश-मानसरोवर की ओर गए सैकड़ों पर्यटकों से संपर्क टूट गया। बुधवार को हिमालय की ऊंचाइयों पर बसे गोसाईं कुंड की ओर श्रद्धालुओं और पर्यटकों का सैलाब उमड़ रहा था। पहाड़ों के बीच आस्था का मेला लगा था। अचानक आई आपदा में 450 विदेशी पर्यटक लापता हो गए। इसके अलावा वहीं पर आर्मी का एक पोस्ट था वहां तैनात सशस्त्र प्रहरी बल के 13, आर्मी के 44, व पुलिस के 32 जवान बाढ़ के पानी के साथ बह गए। नाम न छापने के आग्रह के साथ यह जानकारी नेपाल के पुलिस विभाग और सशस्त्र सेना के एक उच्चाधिकारी ने दी। 12 से अधिक छोटे बड़े गांव बाढ़ के पानी में बह गए हैं।
क्यों प्रसिद्ध है गोसाई कुंड
विष्णु पुराण के अनुसार, जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ, तब उसमें से हलाहल नामक विष निकला था,। भगवान शिव ने उस विष को अपने गले में ले लिया था, इससे उनका गला नीला पड़ गया था। इस नाते वह नीलकंठ कहलाए। विष की जलन से शांत होने के लिए भगवान शिव ने इस ठंडे हिमालयी क्षेत्र में अपने त्रिशूल से पहाड़ पर प्रहार किया, उससे वहां पर तीन धाराएं निकली जिससे इस पवित्र गोसाई कुंड झील का निर्माण हुआ।