सर्वोच्च वीरता पुरस्कार अशोक चक्र विजेता और हीरोइन ऑफ हाईजैक के नाम से मशहूर नीरजा भनोट के छोटे भाई अनीश भनोट का गुरुवार शाम निधन हो गया। परिजनों ने बताया कि शाम को सैर करके जब वह घर लौटे तो अचानक उन्हें हार्टअटैक आ गया और वह घर के बाहर जमीन पर गिर पड़े। परिजन उन्हें जब तक घर के अंदर लाए तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
अनीश के घर में पत्नी शांति भनोट और बेटा हरि भनोट हैं। बेटा हरि भनोट मुंबई स्थित एक कंपनी में सीए हैं। अनीश पब्लिक रिलेशंस के दिग्गजों में से एक थे और वर्तमान में एक रोटेरियन के रूप में कई सोशल प्रोजेक्ट को सिरे चढ़ाने में जुटे थे। वह दिव्यांग (दृष्टिहीन) विद्यार्थियों के लिए काफी काम कर रहे थे। वह ऐसे बच्चों के लिए स्कॉलरशिप भी जुटाते थे। इससे होनहार दिव्यांग विद्यार्थियों को काफी सहारा मिल रहा था।
दुनिया के सामने नीरजा भनोट की साहसिक कहानी लेकर आए थे
आतंकियों से लोहा लेकर 360 विमान यात्रियों की जान बचाने वाली 23 वर्षीय नीरजा भनोट की बहुत सी बातों व उनके नजरिए को दुनिया के सामने अनीश भनोट ही लेकर आए थे।
उन्होंने नीरजा भनोट पर ‘नीरजा भनोट-द स्माइल ऑफ करेज’ बुक लिखी थी। किताब में नीरजा का फ्लाइट में जाने से पहले तक का व्यवहार और तौर-तरीकों के बारे में भी बताया गया है। अनीश बताते थे कि यह पुस्तक मुख्य तौर पर उन लोगों के लिए है जो कि नीरजा भनोट के बारे में जानना चाहते हैं।
नीरजा भनोट का दुनिया मानती है लोहा
5 सितंबर 1986 को अमेरिकी एयरवेज का विमान पैन एम73, करीब 380 यात्री लेकर पाकिस्तान के कराची हवाई अड्डे पर पायलट का इंतजार कर रहा था। अचानक उसमें चार हथियारबंद आतंकवादी घुस गए और सभी यात्रियों को गन प्वांइट पर ले लिया। आतंकवादी प्लेन को 9/11 की तरह इजराइल में किसी निर्धारित जगह पर क्रैश कराना चाहते थे लेकिन नीरजा भनोट ने ऐसा नहीं होने दिया था।
नीरजा ने मौका पाकर विमान के दरवाजे खोल दिए और यात्रियों ने प्लेन से नीचे कूदाना शुरू कर दिया। लेकिन इसी बीच दहशतगर्दों ने गोलियां दागना शुरू कर दी। इन खून-खराबे में 20 लोगों की मौत हुई थी। इस दौरान नीरजा की भी जान चली गई थी।