चंडीगढ़ के डड्डूमाजरा में लगने वाले नए कचरा निस्तारण प्लांट पर उठ रहे सवालों पर राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (नीरी) के निदेशक डॉ. अतुल नारायण वैद्य ने भाजपा, कांग्रेस और आप के पार्षदों के साथ बैठक की। इसके बाद उन्होंने कहा कि नया प्लांट सफल होगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि नगर निगम उस प्लांट को कैसे चलाता है।
डॉ. वैद्य ने कहा कि अब जितने भी नए प्लांट लगते हैं, उनमें सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स-2016 के निर्देशों का पालन करना पड़ता है। उसमें लीचड़, बदबू, जल-वायु प्रदूषण आदि का खास ध्यान रखा जाता है। सवाल किया गया कि पहले जो प्लांट लगाया गया था, उसे लेकर भी ऐसे ही दावे किए गए थे। इस पर निदेशक ने कहा कि पहले वाला प्लांट अधूरा था। उन्होंने भी दौरा किया था। उस समय गीला-सूखा कचरा भी अलग-अलग नहीं होता था। अन्य कई तरह की समस्याएं भी थीं, लेकिन अब बहुत सुधार हो चुका है। पुराने प्लांट से इस नए प्लांट को तुलना नहीं की जा सकती। वह प्लांट अधूरा था और नया प्लांट पूरी तरह से सभी मानकों पर पूरा है।
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उन्होंने कहा कि भविष्य में तीन तरह की तकनीक चलने वाली है। कचरे से इथेनॉल, ग्रीन हाइड्रोजन और कई केमिकल्स बनाए जा सकते हैं लेकिन अभी इन सभी की तकनीक पक्की नहीं है। निदेशक ने बताया कि नया प्लांट लगने के बाद भी करीब 10 फीसदी कचरा ही बचेगा, जिसे बाद में कंपोस्ट किया जाएगा।
कोई प्लांट फ्री में लगा रहा है तो उसका मकसद कुछ और है
क्या ऐसी कंपनी नहीं चुनी जा सकती जो कूड़ा निस्तारण करने के साथ नगर निगम को राजस्व भी दे, इस सवाल पर डॉ. वैद्य ने कहा कि देश में कई तरह के मॉडल चलते हैं जिसमें से रेवेन्यू शेयरिंग के अलावा पीपीपी मॉडव व अन्य हैं। अगर कोई कंपनी मुफ्त में प्लांट लगाने को तैयार है, तो यह बात देखनी चाहिए कि उसकी इंट्रेस्ट कुछ और तो नहीं है। उन्होंने कहा कि फ्री में प्लांट चलाने वाली कई कंपनियां भाग चुकी हैं, क्योंकि प्लांट चलाने में अच्छा खासा खर्च आता है।
कचरे से सीएनजी का प्लांट लग रहा, बिजली का क्यों नहीं
कचरे से बिजली बनाने वाला प्लांट क्यों नहीं लग रहा इस सवाल पर डॉ. वैद्य ने कहा कि चंडीगढ़ से जो कचरा निकलता है, उसमें ज्यादातर गीला कचरा ज्यादा होता है, क्योंकि यहां घर ज्यादा हैं और इंडस्ट्री कम। इंडियन वेस्ट में पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, इसलिए थर्मल टेक्नोलॉजी से इसे दूर रखा जाता है क्योंकि पानी को वाष्पित करने में काफी एनर्जी खर्च होती है। इसके लिए बायोगैस सबसे ठीक मानी जाती है। बायोगैस को प्यूरिफाई करने के बाद बिजली भी बनाई जा सकती है, जैसे कि गोवा में बनाया जा रहा है लेकिन आज के समय में सीएनजी का काफी चलन है। मांग भी ज्यादा है।
कांग्रेस ने पूछा- प्लाज्मा तकनीक का इस्तेमाल क्यों नहीं
बैठक में कांग्रेस के पार्षद गुरप्रीत सिंह गाबी ने सवाल पूछा कि नए प्लांट के लिए प्लाज्मा तकनीक का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा। कुछ साल बाद अगर नई तकनीक आ जाती है तो क्या कंपनी उसे अपने खर्चे पर अपनाएगी या नहीं, क्या ये शर्त है रखी गई है। उन्होंने प्लांट को लगाने से पहले साइंटिफिक रिपोर्ट दिखाने की मांग की। इस पर कहा गया कि रिपोर्ट आनी अभी है। उन्होंने यह भी पूछा कि अगर कंपनी बीच में ही भाग जाती है तो निगम रिकवरी कैसे करेगा।
पार्षद कुलदीप ने पूछा- क्या गोवा में प्लांट रिहायशी इलाके में है
बैठक में डड्डूमाजरा के पार्षद कुलदीप सिंह ने लोगों की समस्याओं को डॉ. वैद्य के सामने रखा। कहा कि डड्डूमाजरा के लोग कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त हैं। हर समय बदबू की वजह से लोगों का जीना मुहाल है। इस पर डॉ. वैद्य ने कहा कि नया प्लांट ही इसका समाधान है। इसमें इन सभी बातों का ध्यान रखा गया है और इस प्लांट के लगने के बाद ज्यादातर समस्याओं का निवारण हो जाएगा। कुलदीप ने निदेशक से यह भी पूछा कि क्या गोवा व अन्य जगहों पर जो प्लांट लगे हैं, वह रिहायशी इलाके में हैं। पार्षद कुलदीप ने बताया कि इस पर निदेशक की तरफ से कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया।