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‘द लाइसेंस’ में झलका दुराचार की शिकार औरत का दर्द

Fri, 02 May 2014 01:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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नियति, एक तांगे वाले की पत्नी। दंगे में जिस का पति जेल में ही सजा काटते हुए मार जाता है। हर पल पुरुष प्रधान समाज से लड़ती नियति की संघर्ष से भरे जिंदगी के साथ वीरवार को सिटी के दर्शक भी जुड़ गए।
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दुराचार की शिकार एक लाचार औरत का दर्द, आंसू और उसकी जिंदगी के साथ दर्शकों का यह लगाव देखने को मिला ‘द लाइसेंस’ नाटक में, जिसका मंचन वीरवार को रॉक गार्डन में किया गया।

यह नाटक पद्मश्री नीलम मान सिंह चौधरी के निर्देशन में प्रस्तुत किया गया। नाटक को एनजीओ वीरांवाली के प्रोजेक्ट नन्ही जान के सहयोग से किया गया।

अभी तो मैं जवान हूं.. से आगाज
नीलम सिंह मान सिंह ने द लाइसेंस नाटक के जरिए एक गरीब, लाचार और हर मोड़ में पुरुषों की गंदी मानसिकता की शिकार एक औरत की कहानी दिखाई गई।

नाटक की शुरुआत भी काफी रोचक रही, जिसमें एक कोने में बैठी एक महिला ने अभी तो मैं जवान हूं.. गीत गाकर सुनाया। तो एक कोने में बांसुरी, तबला और इंस्टूमेंट के जरिए फोक गीत का लाइट म्यूजिक ने इसे ओर रोचक बनाया। फिर शुरू हुआ नाटक के लीड सूरज और नियति के रोमांस का सीन।
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इस सीन को रमनजीत कौर ने सोलो पेश किया। नाटक की शुरूआत में महात्मा गांधी की मौत का जिक्र किया गया। उसके बाद दंगों का दर्द बयां किया गया। जहां एक तांगे वाले सूरज को नियति से रेलवे स्टेशन के सफर में प्यार हो जाता है। दोनों शादी कर लेते हैं, लेकिन शादी के बाद सूरज को झूठे केस में जेल हो जाती है और वह जेल में ही मार जाता है।

इसके बाद नियति अपनी रोजी रोटी के लिए तांगा चलाना शुरू करती है। सूरज का ही दोस्त नियति की लाचारी का फायदा उठाता है। इसके बाद नियति पूरी तरह से टूट जाती है और अंत में एक बार फिर चंडीगढ़ सेक्टर-22 में तांगा चलना शुरू करती हैं, लेकिन यहां भी उसे वहीं सब झेलना पड़ा।

ट्रैफिक पुलिस वाला अंत में उससे तांगा चलने के लिए लाइसेंस मांगता है। लाइसेंस न होने पर उसकी मजबूरी का ट्रैफिक पुलिस अधिकारी फायदा उठाते हैं। अंत में दिखाया गया कि एक दुराचार शिकार महिला थक कर खामोश हो जाती है और खुद को डर कर एक बक्से में बंद कर लेती है।

नाटक के हर सीन को रमनजीत कौर ने बेहतरीन अभिनय के जरिए बयां किया। अभिनय इतना दमदार था कि दर्शक नियति के चीखने पर उसका दर्द महसूस कर रहे थे।

लाइटिंग, म्यूजिक और स्पेशल इफेक्ट का खास रोल
नाटक में लाइटिंग, स्पेशल इफेक्ट्स और म्यूजिक का खास रोल रहा। इसमें लाइटिंग डिजाइन दौलत राम वैद, स्टेट मैनेजमेंट परवीन जग्गी, सेट डिजाइन कबीर सिंह चौधरी और अन्य कलाकारों में पमेला सिंह और अमरजीत रहीं।
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