जेपी दलाल
जेपी दलाल ने जेई की नौकरी छोड़ राजनीति में कदम रखा था। राजनीतिक करियर की शुरुआत 2009 से की थी। भिवानी की लोहारू सीट से जेपी दलाल ने निर्दलीय चुनाव लड़ा था। मगर हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद उन्होंने भाजपा का दामन थामा और 2014 का चुनाव भाजपा उम्मीदवार के रूप में लड़ा। यहां भी किस्मत ने साथ नहीं दिया और मामूली अंतर से हार हुई। 2019 में भाजपा की टिकट पर 18 हजार मतों से जीत हासिल की। इसके बाद मनोहर लाल के दूसरे कार्यकाल में उन्हें कृषि मंत्री की जिम्मेदारी दी गई। अब नायब सिंह सैनी कैबिनेट का भी जेपी दलाल हिस्सा होंगे।
रणजीत सिंह चौटाला
हरियाणा की नई कैबिनेट में रणजीत सिंह चौटाला को भी जगह मिली है। मनोहर लाल कैबिनेट के बाद अब नायब सिंह सैनी कैबिनेट में शामिल होने वाले वह इकलौते निर्दलीय विधायक हैं। रणजीत सिंह पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल के पुत्र और इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के भाई हैं। रणजीत सिंह हरियाणा की रानियां विधानसभा सीट से चुनाव जीत कर विधानसभा पहुंचे हैं। चौटाला परिवार से ताल्लुक रखने वाले रणजीत की रानियां में खासी पहचान है। कांग्रेस से टिकट कटने पर वे निर्दलीय मैदान में उतरे थे और हरियाणा लोकहित पार्टी के गोविंद कांडा को 19431 वोट से हराया था।
डॉ. बनवारी लाल
डॉ. बनवारी लाल को नई कैबिनेट में भी जगह मिली है। मनोहर लाल सरकार में भी वे मंत्री थे। हरियाणा की बावल विधानसभा सीट से वे भाजपा विधायक हैं।
- बावल विधानसभा की आरक्षित सीट से लगातार दूसरी बार विधायक बने।
- प्रदेश में पहली बार बनी भाजपा की सरकार में जन स्वास्थ्य राज्य मंत्री रहे।
- मूलरूप से नारनौल निवासी हैं लेकिन लंबे समय से बावल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बतौर एसएमओ कार्यरत रहे।
- सरकारी नौकरी छोड़कर बावल में ही लंबे समय से राजनीति करने के साथ अस्पताल चला रहे थे।
- 2014 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर राव इंद्रजीत के साथ भाजपा में शामिल हो गए थे।
- राव इंद्रजीत की बदौलत ही भाजपा का टिकट मिला था।
- राव इंद्रजीत समर्थक माने जाते हैं।
मूलचंद शर्मा
मूलचंद शर्मा भाजपा के टिकट पर दूसरी बार चुनाव जीते हैं। पहली बार इन्होंने कांग्रेस के लखन सिंगला को हराया था और इस बार आनंद कौशिक को मात देने में कामयाब रहे। बल्लभगढ़ से विधायक मूलचंद शर्मा पिछली सरकार में शिक्षा मंत्री रहे राम विलास शर्मा के समधी हैं। बता दें कि रामबिलास शर्मा को इस बार चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है।