अमर उजाला ब्यूरो
कैथल। शुक्रवार से नवरात्र उत्सव शुरू हो रहा है। मां के दरबार से लेकर बाजार तक सज गए हैं। मंदिर परिसरों को जहां भी लाइटों से सजाया जा रहा है, वहीं, बाजार भी जगमगा उठे हैं। बड़ी देवी मंदिर, छोटी देवी मंदिर, खाटू श्याम मंदिर, श्री ग्यारह रुद्री मंदिर और हनुमान वाटिका में नवरात्रों की तैयारियां हो चुकी हैं। शुक्रवार को ही दुर्गा अष्टमी बहुत शुभ संयोग है। मां की नवरात्र रखने से व्यापार व कारोबार में वृद्धि लाभ होगा।
कलश स्थापित करने का शुभ समय
सुबह 5.40 से आठ बजकर 10 मिनट बजे तक शुभ मुहूर्त है। हनुमान वाटिका के पंडित प्रेम शंकर शास्त्री ने बताया कि प्रथम नवरात्र के दिन सुबह 5.40 मिनट से 8.10 मिनट तक शुभ मुहूर्त है। इसमें श्रद्धालु स्नान करके घड़ स्थापना कर सकते हैं। विधि विधान के अनुसार, स्नान उपरांत फल-फूल, धूप-दीप, नारियल, चुन्नी, श्रृंगार सामग्री, सिंदूर के साथ आसन लगा कर बगैर भोजन ग्रहण किए जननी शैलपुत्री की उपासना करें।
संकल्प करें कि जिस प्रकार हमने घड़ स्थापना की है, इसी प्रकार हमारा परिवार अन-धन और वैभव से भरा रहे। गुलाब का गुड़हल और गुलाब फूल अर्पण करे। श्रीफल अर्पित करें। पंच मेवा का भोग लगाएं। इसके बाद प्रतिदिन नौ साल से कम उम्र की कन्या का पूजन करें। साथ ही कन्या को दक्षणा अवश्य दें। यदि आसपास कोई कन्या मौजूद न हो तो श्रद्धालु दुर्गा मंदिर में भी फल को चढ़ा सकते हैं।
नवरात्र के दिन दोपहर को डेढ़ से तीन बजे से लेकर राहु काल में कलश स्थापना निषेद है। शरद् नवरात्र पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होगी। नवरात्र में मां दुर्गा के नौ विभिन्न स्वरूपों की अलग-अलग दिन पूजा की जाएगी। प्रथम नवरात्र को शैलपुत्री, द्वितीय को ब्रह्मचारिणी, तृतीय को चंद्रघंटा, चतुर्थ को कुष्मांडा, पांचवें नवरात्र को स्कंदमाता, छठे को कात्यायनी, सातवें को कालरात्रि आठवें को महागौरी और नौवें नवरात्र को सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है।