कैबिनेट मंत्री नवजोत सिद्धू ने शिरोमणि अकाली दल के मौजूदा हालात को लेकर बादल परिवार पर जमकर हमला बोला। साथ ही केंद्र सरकार को भी तेल की कीमतों और किसानों की समस्याओं को लेकर आड़े हाथों लिया। मीडिया से बातचीत में सिद्धू ने कहा कि लगातार पांच चुनाव हारे शिअद का जनाधार लगातार कम होता जा रहा है। अब पार्टी के अंदर भी समर्थन जाना शुरू हो गया है।
एक धृतराष्ट्र था, जिसकी आंखें नहीं थी, उसे हस्तिनापुर नहीं दिखता था, सिर्फ दुर्योधन दिखता था। एक धृतराष्ट्र पंजाब में दो आंखें लेकर पैदा हुआ, उसे भी पंजाब नहीं दिखता, सूबे का हित नहीं दिखता, उसे भी अपना बेटा दिखता है। इन लोगों ने अकाली दल को प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बना दिया। अजनाला, ढींडसा, ब्रह्मपुरा जैसे टकसाली अकालियों को पीछे कर दिया।
अकाली दल मास्टर तारा सिंह, फेरूमान, ज्ञानी किरपाल जैसे लोगों की पवित्र जमात थी। मास्टर तारा सिंह की दोहती किरनजोत कौर का अमृतसर में सबसे ज्यादा सम्मान है। उन्होंने कहा है कि सुखबीर को प्रधान रहने की जरूरत नहीं, खुद ही पद छोड़ें। सिद्धू बोले कि जब तक जीजा-साला हैं, कांग्रेस की पौ बारह है। ताजा दूध फटने में समय लेता है। उसी तरह ये जीजा-साला सौ मन अकाली दल में खट्टा हैं।
केंद्र पर हमला बोलते हुए सिद्धू ने कहा कि एक बैरल 150 डॉलर का बिक रहा था, तब भी डॉ. मनमोहन सिंह ने पेट्रोल के रेट 80 रुपये से ऊपर नहीं जाने दिए। जब 40 डॉलर में पहुंच गया, तब भी मोदी सरकार ने लोगों को फायदा नहीं दिया, सिर्फ तेल कंपनियों को फायदा पहुंचाया। तेल की कीमत 38 रुपये है, 44 रुपये टैक्स है। जीएसटी के अधीन आया तो पेट्रोल की कीमत 45 रुपये से ज्यादा नहीं हो सकती।
सरकार भंवरे की तरह होती है, जिसके फूल चूसने पर किसी को दिक्कत नहीं होती। पर ये सरकार लोगों का खून चूस रही है। उन्होंने कहा कि 1992 में धान का एमएसपी 270 और गेहूं का 330 रुपये था। तब से डीजल बढ़ कर 15 गुना हो गया, पर एमएसपी सिर्फ पांच गुना बढ़ा है। सिद्धू ने एक बार फिर अफीम की खेती की इजाजत देने के मामले में डॉ. धरमवीर गांधी की हिमायत की। साथ एक बार फिर बिक्रम मजीठिया को आड़े हाथों लिया।