बिजली खरीद समझौते की इन अनुचित शर्तों के कारण 2020 तक पंजाब पहले ही 5400 करोड़ रुपये का भुगतान कर चुका है। सबसे बुरी बात यह है कि इन समझौतों के जीवन काल में तय फीसों के लिए पंजाब को कुल 65000 करोड़ रुपये सार्वजनिक फंडों से अदा करने होंगे। सिद्धू ने सीएम मान से कहा कि वह श्वेत पेपर जारी करें कि पिछले दो सालों में उनकी सरकार इन बिजली खरीद समझौतों के तहत कितनी तय फीस अदा कर चुकी है।
साथ ही सवाल किया कि क्या उनकी सरकार के पास सरकारी मालिकी वाली स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनियों और राष्ट्रीय ग्रिड से बिजली खरीद की सुविधा के लिए तंत्र है। सिद्धू ने आगे लिखा है कि यह अस्थिर स्थिति तुरंत कार्रवाई की मांग करती है। उन्होंने कहा कि मान सरकार पहले किए वादे के मुताबिक बिजली खरीद समझौतों को रद्द करे या दोबारा इन्हें रिव्यू करे। क्या मान सरकार जवाबदेह नहीं है। साथ ही तंज कसा कि सरकार का गर्वंनेंस मॉडल फूटे गुब्बारे की तरह है।