पूर्व मंत्री नवजोत सिद्धू के राजनीतिक वनवास पर रविवार को राहुल गांधी की खेती बचाओ रैली में हिस्सा लेने के साथ विराम लग गया। वहीं डेढ़ साल से खामोश बैठे सिद्धू को ऐसे मौके की तलाश थी, जिसके माध्यम से वह अपनी आवाज गांधी परिवार के साथ-साथ पंजाब की जनता तक पहुंचा सके।
नए कृषि कानून के विरुद्ध प्रदेश के किसानों के बवाल ने नवजोत को न केवल यह मौका दिया, बल्कि राहुल गांधी सहित मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस की प्रदेश लीडरशिप को संकेत दिया कि उनकी अगुवाई में केंद्र के साथ जंग लड़ी जा सकती है। सिद्धू के लिए मोगा की रैली मौका भी थी और दस्तूर भी।
इसलिए रैली में किन बिंदुओं पर अपने भाषण को केंद्रित करना है, इसके लिए सिद्धू ने घर में ही तैयारी कर ली थी। सिद्धू ने रैली के लिए पंजाब के कृषि विशेषज्ञों के साथ कृषि कानूनों के बारे में विचार-विमर्श किया ताकि राहुल के सामने दिए जाने वाले भाषण का कंटेंट बाकी नेताओं से अलग हो।
सुनाओ चुटकुला, मैं लगाता हूं ठहाके... सुन रावत हंसे
मोगा रैली में सिद्धू की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए पार्टी के प्रदेश प्रभारी हरीश रावत ने रात को ही सिद्धू को फोन कर सुबह का नाश्ता उनके घर करने की बात कही थी। रावत के साथ उत्तराखंड से उनके साथ आए सहयोगी भी थे। रावत काफिले के साथ सुबह आठ बजे सिद्धू के निवास पर पहुंचे।
नाश्ते से पहले दोनों नेताओं के बीच किसानों के मुद्दे पर चर्चा हुई। नाश्ते की टेबल पर रावत के साथ सहयोगी ने कहा कि सिद्धू साब, आप तो बड़े ठहाके लगते हो, आज चुप क्यों हो। सिद्धू ने तपाक से कहा कि आप कोई चुटकुला सुनाओ, मैं अभी ठहाके लगाता हूं। इस पर रावत ने भी ठहाका लगाया। इसके बाद सिद्धू ने कई चुटकुले सुनाए।
डॉ. राज कुमार और दत्ती भी सिद्धू से मिलने पहुंचे
जब रावत-सिद्धू नाश्ते की टेबल पर बैठे थे, तभी विधायक डॉ. राजकुमार, सुनील दत्ती और मोहिंदर केपी भी सिद्धू के घर पहुंचे। डॉ. राजकुमार व सिद्धू ने एक कोने में खड़े होकर काफी देर बातचीत की। डॉ. राजकुमार माझा के एक मात्र विधायक हैं जिनकी सिद्धू के साथ जमती है और उन्होंने बार-बार कहा कि सिद्धू कांग्रेस के सिपाही हैं और वह कांग्रेस छोड़कर कहीं नहीं जा रहे।
उन्होंने रावत से भी मुलाकात की। इसके बाद रावत और सिद्धू एक ही गाड़ी में बैठकर मोगा रवाना हो गए। वहीं सिद्धू को अपने साथ रैली में ले जाने से रावत ने कांग्रेस हाई कमान को यह संदेश देने की कोशिश की है कि सिद्धू-कैप्टन के बीच पैदा हुए विवाद को निपटाने में वह सक्षम हैं। रावत तीन दिन अमृतसर में रहे और इस दौरान उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों, विधायकों व अन्य सीनियर नेताओं से मुलाकात कर जमीनी हकीकत को जाना।
जानकारी के अनुसार कांग्रेसी नेताओं ने सिद्धू को केंद्र की राजनीति में सक्रिय करने की सलाह दी है। अब रावत प्रदेश की राजनीति में सिद्धू को कोई उच्च पद दिलाने में सफल होंगे, इस पर बतौर प्रदेश प्रभारी उनकी सार्थकता तय होगी।