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नवजोत सिद्धू को भाजपा छोड़ने का फैसला पड़ा भारी, कैप्टन से टकराव की सबसे बड़ी वजह है...

Wed, 18 Mar 2020 10:43 AM IST
खुशबू गोयल अशोक नीर, अमृतसर
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Amarinder Singh, Navjot Singh Sidhu
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पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा भाजपा छोड़ कर कांग्रेस में शामिल होने का फैसला उनके सियासती जीवन पर भारी पड़ गया है।
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सिद्धू को इस बात का एहसास नहीं था कि भाजपा छोड़ने के बाद प्रदेश की सियासत में अपना वर्चस्व स्थापित करने की महत्वाकांक्षा राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी कैप्टन के सामने टेढ़ी खीर होगी। सिद्धू यूट्यूब चैनल के माध्यम से लोगों की नब्ज पढ़ने के जुगाड़ में है, ताकि उन्हें लोगों के बीच अपनी स्वीकार्यता का पता चल सके। ऐसा सिद्धू के नजदीकी लोगों का मानना है।

वहीं विधान सभा चुनाव में अपने विधानसभा हलके के लोगों के साथ किये वादे सिद्धू कब पूरा करेंगे, इस बात का इंतजार पूर्वी विधान सभा के मतदाताओं को है। मंत्री पद की जिम्मेदारी सभालने के बाद अपने विधानसभा हलके में बहुत ही कम बार आए है। भाजपा की सदस्यता व राज्य सभा से इस्तीफा देने के बाद सिद्धू के पांव राजनीति में नहीं जम रहे हैं।
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सांसद के तौर पर वह बादल परिवार के विरुद्ध लड़ते रहे। कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनकी लड़ाई कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ छिड़ गई, जिसका नुकसान कांग्रेस पार्टी को तो हुआ ही। साथ ही प्रदेश की उस जनता ने भी नुकसान झेला, जिसने सिद्धू-कैप्टन की जोड़ी पर उम्मीद लगाई थी की प्रदेश की हालत बदलेगी।
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सियासी महत्वाकांक्षा ने करवाया कैप्टन से टकराव

पंजाब फर्स्ट कह कर सूबे की खोई हुई प्रतिष्ठा को बहाल करने के दावे करने वाले नवजोत सिद्धू कांग्रेस सरकार में ढाई वर्ष तक मंत्री रहे, लेकिन न तो वह शिअद-भाजपा के शासन का में स्थानीय निकाय विभाग में हुए किसी घोटाले को पकड़ पाए, न ही इन वर्षों में अपने गृह नगर  कर लिए कोई बड़ा प्रोजेक्ट देने में नाकाम रहे।

सिद्धू ने चुनाव प्रचार के दौरान तत्कालीन स्थानीय निकाय मंत्री अनिल जोशी के कथित भ्रष्टाचार का मुद्दा उठा कर लोगों से वादे किये थे की वह इनके पर्दाफाश करेंगें। लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। सिद्धू ने मंत्री पद के दौरान एक पत्रकार वार्ता में गंदे नाले के साथ की आबादियों में रहने वाले लोगों की सेहत के साथ हो खिलवाड़ का मुद्दा उठाया था।

सिद्धू ने दावा किया था की वह मुद्दे को कैबिनेट की बैठक में रखेंगे। गंदे नाले के साथ सटी कालोनियों के साथ जुड़े इस मुद्दे पर बाद में खामोशी धारण कर ली। फैक्ट्रियां आज भी अपना गंदा पानी इस नाले में फेंक रही है। अमृतसर नगर निगम के गठन के बाद सिद्धू ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई में हुई निगम बैठक में 100 करोड़ की राशि देने का दवा किया था, वह भी नहीं पूरा हुआ।

सिद्धू गुरुनगरी के लिए न तो केंद्र सरकार का कोई प्रोजेक्ट लेने में सफल रहे और न ही अपने विभाग का विकास का मॉडल पेश कर सके।
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