पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू द्वारा भाजपा छोड़ कर कांग्रेस में शामिल होने का फैसला उनके सियासती जीवन पर भारी पड़ गया है।
सिद्धू को इस बात का एहसास नहीं था कि भाजपा छोड़ने के बाद प्रदेश की सियासत में अपना वर्चस्व स्थापित करने की महत्वाकांक्षा राजनीति के धुरंधर खिलाड़ी कैप्टन के सामने टेढ़ी खीर होगी। सिद्धू यूट्यूब चैनल के माध्यम से लोगों की नब्ज पढ़ने के जुगाड़ में है, ताकि उन्हें लोगों के बीच अपनी स्वीकार्यता का पता चल सके। ऐसा सिद्धू के नजदीकी लोगों का मानना है।
वहीं विधान सभा चुनाव में अपने विधानसभा हलके के लोगों के साथ किये वादे सिद्धू कब पूरा करेंगे, इस बात का इंतजार पूर्वी विधान सभा के मतदाताओं को है। मंत्री पद की जिम्मेदारी सभालने के बाद अपने विधानसभा हलके में बहुत ही कम बार आए है। भाजपा की सदस्यता व राज्य सभा से इस्तीफा देने के बाद सिद्धू के पांव राजनीति में नहीं जम रहे हैं।
सांसद के तौर पर वह बादल परिवार के विरुद्ध लड़ते रहे। कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनकी लड़ाई कैप्टन अमरिंदर सिंह के साथ छिड़ गई, जिसका नुकसान कांग्रेस पार्टी को तो हुआ ही। साथ ही प्रदेश की उस जनता ने भी नुकसान झेला, जिसने सिद्धू-कैप्टन की जोड़ी पर उम्मीद लगाई थी की प्रदेश की हालत बदलेगी।